Ranchi: रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में आयोजित 3 दिवसीय एग्रोटेक किसान मेले का आज सोमवार को समापन हो गया. राज्य के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. जहां उन्होंने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया.

इस मौके पर राज्यपाल ने कृषि के विविधीकरण को किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण उपाय बताया. उन्होंने कहा कि खेती के साथ पशुपालन, बागवानी, मुर्गीपालन, मत्स्यपालन, मधुमक्खीपालन और मशरूम उत्पादन को जोड़कर ही किसानों का जोखिम कम किया जा सकता है और टिकाऊ उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकता है.

आगे राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में झारखंड को आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ बागवानी फसलों का निर्यातक भी बनना चाहिए. इसके लिए वैज्ञानिकों को तकनीकी ज्ञान के प्रसार में और अधिक लगन एवं निष्ठा के साथ कार्य करना होगा.
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों और छात्रों को प्रयोगशालाओं से निकलकर समय-समय पर किसानों के खेतों तक पहुंचना होगा, तभी अनुसंधान के अपेक्षित परिणाम धरातल पर दिखाई देंगे. राज्यपाल ने समुचित पोषण के लिए मडुआ, ज्वार और बाजरा जैसे मिलेट्स के साथ सहजन के फल और पत्तियों को नियमित आहार में शामिल करने की आवश्यकता बताई.
उन्होंने राज्य सरकार से ऐसे किसान मेलों का आयोजन जिला एवं प्रखंड स्तर पर भी करने का सुझाव दिया, ताकि नई तकनीकों की जानकारी दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच सके. भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए झारखंड में स्थित आधा दर्जन आईसीएआर संस्थानों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी. कार्यक्रम में मुख्य सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी भी उपस्थित थे.
बीएयू के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे ने स्वागत भाषण देते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों तथा किसान मेला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर राज्यपाल ने नवोन्मेषी कृषि में विशेष योगदान के लिए 6 प्रगतिशील किसानों— रविंद्र महतो एवं उमेश कुमार महतो (धनबाद), कल्याण कुमार एवं सतीश देवगम (सरायकेला-खरसावां), सजल सहाय (रांची) तथा दिलीप बड़ाइक (जारी, गुमला)—को सम्मानित किया. साथ ही उन्होंने ‘टिकाऊ कृषि हेतू जलवायु अनुकूल तकनीकी नवाचार’ विषय पर प्रकाशित स्मारिका का लोकार्पण भी किया.
IILM कांके को सर्वाधिक 18 पुरस्कार
तीन दिवसीय उद्यान प्रदर्शनी में भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान (आईआईएलएम), कांके को 7 प्रथम पुरस्कार सहित कुल 18 पुरस्कार प्राप्त हुए. धनबाद के नरेश कुमार महतो ने 5 प्रथम पुरस्कार सहित कुल 12 पुरस्कार प्राप्त कर दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि होचर, कांके के राम कुमार साहू 8 पुरस्कार के साथ तीसरे स्थान पर रहे.
फल, फूल, सब्जी, मसाले, सजावटी, औषधीय और सुगंधित पौधों से संबंधित इस प्रदर्शनी में 236 किसानों की कुल 1115 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं.
थीम स्टॉल में पशु उत्पादन एवं प्रबंधन प्रथम
थीम पंडाल में गुणवत्ता के आधार पर पशु उत्पादन एवं प्रबंधन को प्रथम, फसल सुधार को द्वितीय तथा कृषि यंत्रीकरण, मूल्य संवर्धन एवं ऊर्जा प्रबंधन को तृतीय पुरस्कार मिला. सरकारी संस्थाओं में इफ्को को प्रथम, राज्य मत्स्य निदेशालय को द्वितीय और राष्ट्रीय बीज निगम को तृतीय स्थान मिला. कृषि विज्ञान केंद्रों में दिव्यायन रांची, बोकारो और खूंटी शीर्ष तीन स्थानों पर रहे.
आईसीएआर संस्थानों में अनुसंधान केंद्र पलांडू को प्रथम, राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान, नामकुम को द्वितीय तथा केंद्रीय उपराऊं भूमि चावल अनुसंधान संस्थान, हजारीबाग को तृतीय घोषित किया गया. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी, पलामू के स्टॉल को भी पुरस्कृत किया गया.
कृषि विज्ञान केंद्रों, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों, आत्मा, किसान उत्पादक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा राज्य सरकार के विभागों के सहयोग से आयोजित इस मेले में राज्य के लगभग सभी जिलों के किसानों की सक्रिय भागीदारी रही. कार्यक्रम का समन्वयन प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. रेखा सिन्हा ने किया, जबकि संचालन शशि सिंह ने किया.
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