New Delhi : केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सभी छह छंदों को आधिकारिक समारोहों में गाने के आदेश का ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने विरोध किया है. इसे असंवैधानिक करार देते हुए कोर्ट जाने की बात कही है. पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने सरकार को चेतावनी दी है कि इस आदेश को अविलंब वापस लिया जाये.
The central government’s notification making it mandatory to recite all verses of “Vande Mataram” in schools and official functions is unconstitutional, against religious freedom, secular values, and contrary to the Supreme Court’s Judgment. The song contains references to the… pic.twitter.com/NTNFRdWU6P
— All India Muslim Personal Law Board (@AIMPLB_Official) February 12, 2026
जान लें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा निर्देश जारी कर कहा गया है कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और राष्ट्रगान जन गण मन एक साथ बजाये जाने पर वंदे मातरम के सभी छह छंद पहले गाये जायेंगे, 28 जनवरी के आदेश में गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत गाने के लिए एक प्रोटोकॉल तय किया था,
प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रीय समारोहों में राष्ट्रपति के आगमन, तिरंगा फहराने और राज्यपालों के भाषणों के दौरान वंदे मातरम के छह छंद, गाये जायेंगे, जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड है. इसी आदेश पर एआईएमपीएलबी को आपत्ति है. वह इसे असंवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करने वाला बता रही है,
बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने इस आदेश के विरोध में प्रेस बयान जारी किया है. कहा कि यह निर्णय मुसलमानों के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है.
उनकी दलील थी कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह और संविधान सभा में हुई चर्चा के बाद तय किया गया था कि वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद ही गाये जायेंगे.
उन्होंने कहा कि इस गीत में दुर्गा व अन्य देवताओं की पूजा और वंदना का जिक्र है. कहा कि यह सीधे तौर पर मुसलमानों की धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध है.
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