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केंद्र सरकार का यू टर्न, राहुल गांधी के खिलाफ अभी विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं

New Delhi :  संसद से एक बड़ी खबर आयी है. केंद्र की मोदी सरकार राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लायेगी. सूत्रों के अनुसार अभी राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही नहीं होगी, हालांकि राजनीतिक टकराव जारी है.

 

 

अहम बात यह है कि यदि राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव सदन में लाया जाता है और वह मंजूर हो जाता है और सदन चाहे तो राहुल गांधी को सदन से निष्कासित कर सकता है. उनकी सदस्यता भी जा सकती है. 


खबर है कि चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने राहुल गांधी के भाषण के कथित आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने के लिए नोटिस दिया है. बता दें कि उनके भाषण के कुछ अंश पहले ही रिकॉर्ड से हटा दिये गये हैं. हालांकि भाजपा का मानना है कि इतना पर्याप्त नहीं है. 

 

एक खबर और है कि  केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर राहुल गांधी द्वारा लगाये गये आरोपों का जवाब वे खुद सदन में देंगे.


बता दें कि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कल बुधवार को कहा था कि सदन को गुमराह करने और बेबुनियादी बयान देने के लिए हम राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस पेश करेंगे.

 

कहा था कि लोकसभा-राज्यसभा में प्रक्रिया और कामकाज के संचालन के नियम बहुत स्पष्ट हैं. रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ बेकार और झूठे आरोप लगाये हैं. याद करें कि  राहुल गांधी कहा था कि प्रधानमंत्री ने भारत और भारतीय हितों को बेच दिया है.  

 

हालांकि इससे पहले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बताया कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ सब्सटैंटिव मोशन शुरू करने के लिए नोटिस दिया है उनकी लोकसभा मेंबरशिप कैंसिल कर की मांग की है. यह भी मांग का है कि उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से रोक दिया जाये.


संसद परिसर में निशिकांत दुबे पीटीआई से  कहा कि अपने नोटिस में उन्होंने कहा है कि कैसे विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) सोरोस फाउंडेशन, USAID, फोर्ड फाउंडेशन के साथ विदेश में मिल कर साजिश रचते हैं.

 

 

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