Ranchi: झारखंड टी20 लीग के फाइनल मैच के दौरान जेएससीए स्टेडियम में हुई भगदड़ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता अजय शाह ने जेएससीए प्रबंधन और राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने, दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने और जेएससीए के कर्ताधर्ता अजयनाथ सहदेव के इस्तीफे की मांग की.
अजय शाह ने कहा कि झारखंड क्रिकेट और महेंद्र सिंह धोनी के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले एक वर्ष से जेएससीए लगातार विवादों में है. उन्होंने कहा कि मई 2025 में भी बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जेएससीए में वित्तीय अनियमितताओं और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया था.
उन्होंने कहा कि झारखंड टी20 लीग के फाइनल मैच में प्रबंधन ने फ्री एंट्री की घोषणा की थी. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग स्टेडियम पहुंच गए और अव्यवस्था के कारण भगदड़ मच गई. अजय शाह के अनुसार इस घटना में करीब 25 लोग घायल हुए, जबकि एक बच्चा गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती है.
अजय शाह ने जेएससीए और पुलिस के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें घटना के लिए भीड़ को जिम्मेदार बताया गया था. उन्होंने कहा कि प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है.
उन्होंने पूछा कि जब फ्री एंट्री की घोषणा की गई थी तो भीड़ का अनुमान क्यों नहीं लगाया गया. अगर टिकट स्कैनिंग नहीं होनी थी तो लोगों को घंटों गेट के बाहर क्यों रोका गया. उनका आरोप है कि अचानक गेट खोले जाने से बैरिकेड टूट गए और महिलाएं व बच्चे घायल हो गए.
अजय शाह ने कहा कि भीड़ बढ़ने के बाद भी इमरजेंसी गेट नहीं खोले गए. केवल एक गेट से प्रवेश कराने के कारण हालात बिगड़ गए. उन्होंने आरोप लगाया कि जेएससीए प्रबंधन आम दर्शकों की सुरक्षा के बजाय वीवीआईपी मेहमानों की व्यवस्था में व्यस्त था.
उन्होंने यह भी दावा किया कि स्टेडियम में पर्याप्त मेडिकल सुविधा नहीं थी. भगदड़ के बाद घायलों को अपने स्तर पर विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए जाना पड़ा. उनका कहना था कि भीड़ बढ़ने के बावजूद न तो एसडीआरएफ को सूचना दी गई और न ही अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की गई.
अजय शाह ने आरोप लगाया कि भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी बाउंसर्स पर छोड़ दी गई, जिन्होंने लोगों के साथ मारपीट की. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि घटना के 48 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी अब तक किसी के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई.
उन्होंने कहा कि अजयनाथ शाहदेव को सामने आकर जवाब देना चाहिए. उनके अनुसार मीडिया के सवालों का जवाब देने के बजाय पूरी जिम्मेदारी दूसरे पदाधिकारियों पर छोड़ दी गई है.
प्रेस वार्ता में अजय शाह ने तीन प्रमुख मांगें रखीं. उन्होंने कहा कि मामले की जांच किसी सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए. साथ ही अजयनाथ सहदेव तत्काल इस्तीफा दें और पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर दर्ज की जाए. उन्होंने यह भी मांग की कि घटना में घायल लोगों को जेएससीए की ओर से 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए.
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