Ranchi: झारखंड सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए 11.87 प्रतिशत राशि का प्रावधान किए जाने के बावजूद आजसू (AJSU) छात्र संघ ने इसे छात्र और युवा विरोधी करार दिया है. छात्र संघ के नेताओं ने कहा कि बजट में शिक्षा की जमीनी समस्याओं के समाधान की कोई ठोस पहल नजर नहीं आती.
प्रोफेसरों की कमी पर सरकार को घेरा
आजसू छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थिति चिंताजनक है. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2009 के बाद से प्रोफेसरों की स्थायी नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लोहरदगा का महिला कॉलेज केवल एक प्रोफेसर के भरोसे संचालित हो रहा है. ओम वर्मा ने कहा कि नए विश्वविद्यालयों की घोषणा करने से पहले सरकार को मौजूदा संस्थानों में शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी दूर करनी चाहिए.
डेढ़ साल से छात्रवृत्ति लंबित
छात्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष ऋतुराज ने कहा कि पिछले डेढ़ साल से राज्य के छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली है. उन्होंने कल्याण मंत्री चमरा लिंडा से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की.
ऋतुराज ने कहा कि छात्रवृत्ति नहीं मिलने के कारण कई छात्र आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं और उन्हें पढ़ाई छोड़कर जीविका के लिए छोटे-मोटे काम करने पड़ रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य और केंद्र सरकार इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं, जबकि छात्र परेशान हैं.
चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान
आजसू छात्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि फरवरी माह के भीतर छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं किया गया और शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा. संघ ने मुख्यमंत्री आवास और विधानसभा घेराव करने की भी घोषणा की है. छात्र नेताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए वे किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं.
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