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31 साल पुराने हत्या केस के सभी आरोपी बरी, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द किया

Ranchi: हाईकोर्ट ने लगभग 31 साल पुराने हत्या मामले में फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया. सभी जीवित आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा. कोर्ट ने नुंनदेव मेहरा, नरेश मेहरा और अन्य की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई की.
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Ranchi: हाईकोर्ट ने लगभग 31 साल पुराने हत्या मामले में फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया. सभी जीवित आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा. कोर्ट ने नुंनदेव मेहरा, नरेश मेहरा और अन्य की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई की.

 

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने अभियुक्तों के जुलाई 1998 के दोषसिद्धि और सजा दोनों को रद्द कर दिया, साथ ही कोर्ट ने अपीलकर्ता की अपील स्वीकार कर ली.

 

क्या कहा हाईकोर्ट ने


खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि ट्रायल कोर्ट ने गलत अनुमान और अपूर्ण साक्ष्यों के आधार पर फैसला दिया. मुख्य गवाह (सूचना देने वाली) की गवाही को विश्वसनीय मानने का आधार पर्याप्त नहीं था. अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप सिद्ध नहीं कर सका. 

 

 क्या था मामला


यह मामला दुमका जिले के जामा थाना क्षेत्र में वर्ष 1995 में हुई हत्या से जुड़ा है. शिकायतकर्ता दया देवी के फर्दबयान के अनुसार, 22 फरवरी 1995 की रात करीब 9 बजे कई लोग हथियारों से लैस होकर उनके घर में घुस आए. 


आरोप था कि मुख्य आरोपी नुंनदेव मेहरा ने भुजाली से हमला कर संतु मेहरा की हत्या कर दी. घटना के दौरान अन्य आरोपियों पर घर से चांदी के गहने, नकद 800 रुपये और कुछ बर्तन लूटने का भी आरोप लगाया गया था. पुराने विवाद और दुश्मनी को घटना का कारण बताया गया था.

 

ट्रायल कोर्ट का क्या था फैसला 

 

दुमका के 6वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 28 जुलाई 1998 को फैसला सुनाते हुए  नुंनदेव मेहरा को धारा 302 IPC के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी. जबकि नरेश मेहरा, शंकर मेहरा और जयकांत मेहरा को धारा 148 IPC के तहत दो वर्ष की सजा सुनाई थी.

 

 

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