Ranchi : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में आदिवासी छात्र संघ ने शनिवार को एक सार्वजनिक सूचना जारी कर संगठन के नाम का दुरुपयोग किए जाने का आरोप लगाया है. संघ ने कहा कि कुछ लोग आदिवासी छात्र संघ के नाम पर एनजीओ संचालित कर छात्रों को गुमराह कर रहे हैं और शिक्षकों के साथ मारपीट जैसी घटनाओं में संगठन का नाम जोड़कर उसकी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है.
जारी बयान में संघ ने कहा कि उसका इतिहास संघर्ष का रहा है, किसी प्रकार की "दुकानदारी" का नहीं. संगठन के अनुसार आदिवासी छात्र संघ की स्थापना 8 जुलाई 2000 को हुई थी और तब से यह आदिवासी छात्रों के अधिकार, सम्मान और उनकी आवाज उठाने के लिए लगातार कार्य करता रहा है.
संघ ने दावा किया कि वर्ष 2015-16 में निबंधन संख्या-24 के तहत एक एनजीओ का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष सुशील उरांव को बनाया गया. संगठन का आरोप है कि यह एनजीओ निजी स्वार्थ और पैसे कमाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है और इसका वर्ष 2000 में स्थापित मूल आदिवासी छात्र संघ से कोई संबंध नहीं है.
बयान में हाल ही में डीएसपीएमयू के जूलॉजी (प्राणी विज्ञान) विभाग के शिक्षक के साथ हुई मारपीट की घटना का भी उल्लेख किया गया है. आदिवासी छात्र संघ ने कहा कि शिक्षकों पर हाथ उठाना गुंडागर्दी है, छात्र हित नहीं. संगठन का कहना है कि ऐसी घटनाओं से विश्वविद्यालय का माहौल खराब हो रहा है और भोले-भाले छात्रों को गुमराह किया जा रहा है. संघ ने स्पष्ट किया कि उसके संगठन में हिंसक और असामाजिक तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं है.
आदिवासी छात्र संघ ने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि संगठन के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों और कथित एनजीओ संचालकों के खिलाफ सख्त और शीघ्र कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही छात्रों से अपील की गई है कि वे ऐसे लोगों से सतर्क रहें और किसी के बहकावे में न आएं.
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