Hajipur: जिले के वैशाली महिला कॉलेज में आयोजित “World Logic Day” के अवसर पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया. इस व्याख्यान माला में भारतीय तर्क परंपरा और समकालीन वैश्विक राजनीति पर गहन विमर्श देखने को मिला. व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता जमशेदपुर कोऑपरेटिव कॉलेज में दर्शनशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. डुमरेन्द्र राजन ने कहा कि आज की दुनिया में तर्क ‘विजय’ का माध्यम बन गया है, जबकि भारतीय परंपरा उसे ‘विमर्श’ का साधन मानती है.
डॉ. राजन ने न्याय दर्शन में वर्णित वाद, जल्प और वितंडा की व्याख्या करते हुए कहा कि आज वैश्विक स्तर पर अमेरिका जैसे शक्तिशाली राष्ट्रों में जल्प और कुछ पड़ोसी देशों में वितंडा की प्रवृत्ति दिखती है, जबकि भारत की परंपरा सदैव वाद अर्थात् सत्य की खोज—पर आधारित रही है. भारतीय धर्म/दर्शन का अर्थ अंधश्रद्धा नहीं है. भारत वह भूमि है जिसने तर्क की कसौटी पर सत्य (प्रमा) को प्राप्त करने की कला विकसित की. भगवान महावीर, बौद्धिक अहिंसा के प्रणेता हैं, महावीर ने तर्क को संघर्ष नहीं, बल्कि संवाद का माध्यम बनाया. अनेकांतवाद और स्यादवाद भारतीय तर्क की आत्मा हैं, जो हमें सत्य के विविध आयामों को समझने की क्षमता प्रदान करते हैं.

वहीं, प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि भारतीय तर्कशास्त्र लोकतांत्रिक चेतना का आधार है, जो केवल एक सत्य नहीं बल्कि अनेक संभावनाओं को स्वीकार करता है.
इस व्याख्यान माला में डॉ. रेशमा सुल्ताना ने विषय प्रवेश एवं स्वागत भाषण दिया. कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. शिवि सिन्हा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सरिता कुशवाहा ने दिया. डॉ. सिंगला प्रभा, डॉ. मोहम्मद इस्माइल, मनिकेश कुमार, डॉ. अभिषेक, डॉ. शबनम प्रवीण, डॉ. प्रभाश्री, डॉ. विभा कुमारी, डॉ. आलिया खान, डॉ. निभा कुमारी, डॉ. स्नेह लता, डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. अनुप्रिया, डॉ. बबीता सहित विभिन्न विभागों के शिक्षकों के अलावा सैकड़ों छात्र-छात्राओं की सहभागिता ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया.
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