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बौद्धिक आंदोलन के लिए खगेंद्र ठाकुर का अवदान अमूल्य : अजय सिंह

Ranchi : मूर्धन्य आलोचक, साहित्यकार और विचारक खगेंद्र ठाकुर की 6वीं पुण्यतिथि के अवसर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के राज्य कार्यालय स्थित सभागार में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. इस अवसर पर उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

 

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए सीपीआई राज्य कार्यकारिणी सदस्य सह जिला मंत्री अजय सिंह ने कहा कि डॉ खगेंद्र ठाकुर के निधन से देश और विशेषकर झारखंड में बौद्धिक आंदोलन को गहरी क्षति पहुंची है. वक्ताओं ने कहा कि डॉ खगेंद्र ठाकुर हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में अपने सशक्त लेखकीय अवदान के लिए जाने जाते थे. 

 

वे आलोचना, व्यंग्य, कविता और संस्मरण के क्षेत्र में सक्रिय रहे. उनका जाना हिंदी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. उनका व्यक्तित्व अत्यंत सादगीपूर्ण और आत्मसंयमी था, जिसमें दिखावे या आडंबर का कोई स्थान नहीं था. वे निजी जीवन को सार्वजनिक मंच पर लाने से हमेशा परहेज करते थे.

 

डॉ खगेंद्र ठाकुर की प्रमुख कृतियों में आलोचना के क्षेत्र में ‘विकल्प की प्रक्रिया’, ‘आज का वैचारिक संघर्ष : मार्क्सवाद’, ‘आलोचना के बहाने’, ‘समय’ शामिल हैं. वहीं कविता संग्रहों में ‘धार एक व्याकुल’ और रक्त कमल परती विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं.

 

इस अवसर पर मुख्य रूप से सीपीआई राज्य सचिव महेंद्र पाठक, जिला सचिव अजय सिंह, किरण कुमारी, अरुण गुप्ता, वीरेन्द्र विश्वकर्मा, मनोज ठाकुर, श्यामल, भारती जी, विजय वर्मा, राजेश यादव, योगेन्द्र बेनी सहित दर्जनों पार्टी कार्यकर्ता और साहित्यप्रेमी उपस्थित थे.

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