Washington DC : अमेरिका इस सप्ताह के अंत तक ईरान पर सैन्य कार्रवाई करने की तैयारी में है. हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया है. यह दावा CNN और CBS News की रिपोर्टों में किया गया है.
US mulls strike on Iran; President Trump yet to make the final call
— ANI Digital (@ani_digital) February 19, 2026
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जिनेवा वार्ता के बाद बढ़ा तनाव
दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है. हाल ही में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में अहम बैठक हुई.
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लीविट के अनुसार, जिनेवा वार्ता में कुछ प्रगति हुई है. लेकिन कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच अब भी बड़ा मतभेद है. उम्मीद है कि ईरान अगले कुछ हफ्तों में अपने प्रस्ताव का विस्तृत जवाब देगा.
लीविट ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए कूटनीतिक समाधान पहली प्राथमिकता है, सैन्य कार्रवाई नहीं. उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ समझौता करना उसके लिए समझदारी होगी.
सैन्य तैयारी और संभावित फैसला
CBS न्यूज के अनुसार, ट्रंप को उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने जानकारी दी है कि अमेरिकी सेना शनिवार तक संभावित हमले के लिए तैयार हो सकती है. हालांकि हमले को मंजूरी देने या न देने का अंतिम निर्णय राष्ट्रपति को ही लेना है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन मिडिल ईस्ट से कुछ कर्मियों को अस्थायी रूप से हटा रहा है, ताकि संभावित जवाबी कार्रवाई की स्थिति में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. बताया जा रहा है कि पिछले कई हफ्तों से अमेरिकी सैन्य बल क्षेत्र में सक्रिय हैं और रणनीतिक तैयारियां की जा रही हैं.
ईरान के सुप्रीम लीडर की ओर से अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बनाने की कथित धमकी के बाद तनाव और बढ़ गया है. अब पूरी दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं.
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन
इस बीच, ईरान में भी बीते 28 दिसंबर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी है. यह प्रदर्शन देश की खराब आर्थिक स्थिति, गिरती मुद्रा (रियाल) और महंगाई के खिलाफ चल रही है.
शुरुआत में तेहरान में दुकानदारों और व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद किए, लेकिन बाद में आंदोलन कई शहरों में फैल गया. कई जगह सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी हुई.
स्थिति बिगड़ने पर 8 जनवरी 2026 को ईरानी सरकार ने देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दीं और सुरक्षा बल तैनात किए. अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने इस कदम की आलोचना की और इसे सूचना दबाने की कोशिश बताया.
अमेरिका ने ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए कुछ ईरानी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाए हैं. वहीं, ईरानी नेतृत्व ने इन आरोपों को विदेशी हस्तक्षेप बताया है और अमेरिका, इजराइल व यूरोपीय देशों पर देश में अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाया है.
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