- मोदी सरकार की चुप्पी भारत के आर्थिक भविष्य को खतरे में डाल रही है.
- भारत का 40 फीसदी से ज्यादा तेल आयात होर्मुज स्ट्रेट से होता है.
- हमें ऐसे पीएम की जरूरत नहीं जिसने रणनीतिक स्वतंत्रता के साथ समझौता कर लिया हो
New Delhi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबाये जाने की घटना को भारत की विदेश नीति की विफलता करार दिया है.
बता दें कि कल 4 मार्च को श्रीलंका के तट से महज 40 नॉटिकल मील दूर अमेरिकी नौसेना ने टारपीडो फायर कर ईरानी युद्धपोत फ्रिगेट आईआरआईएस डेना को डुबा दिया था. खबर है कि इस घटना में ईरान के 87 नौसैनिक मारे गये हैं.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और जयराम रमेश ने इस घटना को भारत की विदेश नीति की विफलता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया है. राहुल गांधी ने चेताते हुए कहा कि भारत का 40 फीसदी से ज्यादा तेल आयात होर्मुज स्ट्रेट से होता है.
The world has entered a volatile phase. Stormy seas lie ahead.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 5, 2026
India’s oil supplies are under threat, with more than 40% of our imports transiting the Strait of Hormuz. The situation is even worse for LPG and LNG.
The conflict has reached our backyard, with an Iranian warship…
कहा कि लड़ाई अब हमारे मुहाने पर पहुंच गया है. ईरानी जहाज को हिंद महासागर में डूबा दिया गया है. फिर भी प्रधानमंत्री(मोदी) चुप हैं. राहुल गांधी ने कहा कि भारत को एक मजबूत हाथ की जरूरत है.
हमें ऐसे पीएम की जरूरत नहीं है, जिसने हमारी रणनीतिक स्वतंत्रता के साथ समझौता कर लिया हो. इस क्रम में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, 'जिस ईरानी युद्धपोत को अमेरिका ने निशाना बनाया,
भारतीय नौसेना का प्रमुख बहुपक्षीय अभ्यास MILAN पहली बार 1995 में आयोजित किया गया था। इसका 13वां संस्करण 19 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापट्टनम में आयोजित हुआ, जिसमें अमेरिका और ईरान सहित अन्य देशों के 18 युद्धपोतों ने भाग लिया। इस अभ्यास का उद्घाटन रक्षा मंत्री ने किया था।…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) March 5, 2026
उसने कुछ दिन पहले (19-25 फरवरी 2026) विशाखापट्टनम में आयोजित भारतीय नौसेना के मिलान'अभ्यास में शिरकत की थी. लिखा कि यह जहाज भारत का मेहमान था. हमारे जल क्षेत्र से निकलते ही इसे निशाना बनाया गया. यह चौंकाने वाला है.
मोदी सरकार की चुप्पी दर्शाती है कि वह डरी हुई है. केरल कांग्रेस ने कहा कि हमारा रणनीतिक साझेदार (अमेरिका) भारत को बिना बताये उसके इलाके में ऐसी मनमानी कैसे कर सकता है?
कांग्रेस ने मांग की कि भारत को वाशिंगटन के सामने अपनी आधिकारिक नाराजगी दर्ज करानी चाहिए.जान लें कि भारत अपनी 80फीसदी ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर है.
जानकारों का कहना है कि हिंद महासागर में अमेरिका का सैन्य सक्रियता ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी सप्लाई चेन को पूरी तरह तबाह कर सकती है. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार की 'चुप्पी भारत के आर्थिक भविष्य को खतरे में डाल रही है.
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