Lagatar Desk: इधर चुनाव आयोग पर आरोप लग रहे हैं कि वह जान बूझकर और एक पार्टी के पक्ष में काम कर रहा है. अनियमित तरीका अपना कर देश के 13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए. विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली की रैली में व्यस्त रहा. इन सबके बीच केंद्रीय पंचायती राज और मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के बयान पर किसी ने गौर ही नहीं किया.
मंत्री ललन सिंह ने दिल्ली में 30-31 अक्टूबर को आयोजित जन योजना अभियान 2026-27 पर आयोजित कार्यशाला में कहा है कि पंचायतों से जुड़ी योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और भुगतान में बड़ा बदलाव लाया जा रहा है. अब तक आधार नंबर को पहचान का आधार (AADHAR) मानकर भुगतान किया जा रहा था. लेकिन जल्द ही आधार नंबर की जगह पहचान के लिए वोटर आईडी का ईपिक (EPIC) नंबर और बायोमेट्रिक को अनिवार्य किया जायेगा.
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उन्होंने आगे कहा कि आधार कार्ड से लाभार्थियों की पहचान नहीं होगी. ईपिक नंबर से लाभार्थियों की पहचान की जायेगी और भुगतान किया जायेगा. योजनाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर जरुरत आधारित योजना बनाने पर जोर दिया जायेगा.
साफ है कि मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब अब साफ हो गया है कि जिनके नाम कटेंगे, उन्हें आगे चलकर सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है. हालांकि अभी तक इससे संबंधित कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं.
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