- नक्सलियों से लड़ते हुए हमारे पांच हजार से ज्यादा जवान शहीद हुए हुए हैं.
- बच्चों का अपहरण कर उनको नक्सली बनाने का काम किया गया
- डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भी देश के सामने स्वीकारा था कि सबसे बड़ी आंतरिक समस्या माओवाद है.
- छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा.
- शाह ने कहा कि नक्सली वोट से नहीं बुलेट से सत्ता चाहते हैं.
New Delhi : अमित शाह ने आज लोकसभा में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर जारी चर्चा का जवाब देते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कही. श्री शाह ने कहा कि नक्सली वोट से नहीं बुलेट से सत्ता चाहते हैं. बताया कि नक्सलियों से लड़ते हुए हमारे पांच हजार से ज्यादा जवान शहीद हुए हुए हैं. कहा कि कुछ लोग बातों से नहीं मानते.
गृह मंत्री शाह ने कहा,बच्चों का अपहरण कर उनको नक्सली बनाने का काम किया गया है.. किसानों के खेत में बारूद बिछाये गये उनको घायल किया गया. अमित शाह ने कथित बुद्धिजीवियों पर हमलावर होते हुए कहा, हमने लगभग दो हजार ऐसे आर्टिकल पढ़े, जिनमें नक्सलियों की वकालत की गयी है. मैं इनको मानवतावादी नहीं मानता.
VIDEO | In Lok Sabha during discussion on Naxal-free movement, Union Home Minister Amit Shah (@AmitShah) says, "See their ideology, in the history of 10,000 years, many ideal people emerged, a list can be made, they did not consider Tilka Majhi, Bhagat Singh, Birsa Munda, Subhash… pic.twitter.com/qh42dl0hXb
— Press Trust of India (@PTI_News) March 30, 2026
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ये जो नक्सलियों के वकील बने हुए हैं, वे कहते हैं कि अन्याय हो रहा है. गृह मंत्री ने पूछा, यदि अन्याय हो रहा है तो उसके लिए व्यवस्थाएं बनी हैं. अदालतें बनी हैं. लेकिन क्या हथियार उठा लोगे. संविधान को नहीं मानोगे. ऐसा नहीं चलेगा. ये नरेंद्र मोदी की सरकार है. जो भी हथियार उठाएगा, उसका यही अंजाम होगा.
उन्होंने कहा कि बस्तर में लाल आतंक की परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं पहुंचा. शाह ने सलवा जुडूम का जिक्र करते हुए कहा कि कोर्ट ने हथियार वापस लेने का आदेश दे दिया. उसके बाद किया हुआ. नक्सलियों के हाथो में हथियार थे. उन्होंने सलवा जुडूम से जुड़े लोगों को चुन-चुनकर गोली मारी.
अमित शाह ने सुदर्शन रेड्डी का जिक्र कर कहा, वे विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाये गये. कांग्रेस कहती है कि हमारा नक्सलवाद से क्या लेना देना है. कहा कि यही लेना-देना है. शाह ने कहा, मैं उनको वोट देने वालों की निंदा करता हूं. उनकी आइडियोलॉजी क्या थी. सबको पता है.
अमित शाह ने कहा कि 20 अगस्त 2019 को गृह मंत्रालय में मीटिंग हुई. इसमें पूर्व नक्सलियों को खुफिया इनपुट में लेने का काम पर मंथन किया गया. पर इसमें देर हुई, क्योंकि छत्तीसगढ़ में उस समय कांग्रेस की सरकार थी. आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा.
अमित शाह के बयान पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. इस पर अमित शाह ने कहा, भूपेश बघेल को पूछो... प्रूफ दूं क्या यहां पर. गृह मंत्री ने कहा, 2023 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली. हमारी सरकार आयी. 24 अगस्त 2024 को हमने यह ऐलान किया कि 31 मार्च 2026 को हम नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त कर देंगे.
अमित शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भी देश के सामने स्वीकारा था कि सबसे बड़ी आंतरिक समस्या माओवाद है. मगर कुछ नहीं हुआ. मोदी सरकार ने कई समस्याओं का निराकरण किया अनुच्छेद 370, 35 ए हट गए. राम मंदिर बन गया.
शाह ने कहा, कई बड़े काम जो आजादी के समय से देश की जनता चाहती थी कि कभी न कभी होने चाहिए, वह सारे काम नरेंद्र मोदी के 12 साल के शासन काल में हुए हैं. नक्सलमुक्त भारत भी इसी में हो रहा है. इस सफलता का श्रेय सीएपीएफ, कोबरा, छत्तीसगढ़ पुलिस और आदिवासी बाशिंदों को जाता है.
अगर उनका सहयोग न होता, तो यह संभव नहीं होता. अमित शाह ने कहा कि माओवाद की विचारधारा का विकास से कोई लेनदेन नहीं है. हम देश आजाद हुए, तो हमने कहा, सत्यमेव जयते. लेकिन माओवाद का ध्रुव वाक्य है. सत्ता बंदूक की नली से निकलती है.
इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं. विपक्ष पर हमलावर होते हुए कहा, यहां कई लोग सारे लोग कह रहे कि यह अन्याय है. श्री शाह ने पूछा, तो फिर अन्याय के खिलाफ लड़ने का तरीका क्या है. क्या हम अंग्रेजों से नहीं लड़े.
कुछ लोगों ने नक्सलियों की शहीद भगत सिंह और बिरसा मुंडा से तुलना कर दी. उनकी विचारधारा कहती है कि दीर्घकालीन युद्ध ही हमारी विचारधारा को फैला सकती है. इन्होंने तिलका मांझी, बिरसा मुंडा को आदर्श नहीं समझा. इन्होंने आदर्श माओ को कहा. इसे भी फॉरेन से आयात किया गया है.
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