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अमित शाह ने कहा, आलोक रंजन का कार्यकाल NCRB के  इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

NewDelhi :  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज शुक्रवार को 26वें ऑल इंडिया फिंगरप्रिंट कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. अमित शाह ने  कहा, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के प्रमुख आलोक रंजन का कार्यकाल NCRB और आपराधिक न्याय प्रणाली, दोनों के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा.

 

श्री शाह ने कहा कि उनके नेतृत्व में NCRB  जानकारी जमा करने से लेकर अपराधी का अपराध साबित करने तक की प्रक्रिया में एक अहम स्तंभ बन गया है.  कहा कि BPR&D (पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो) और NCRB ने गृह मंत्रालय के साथ मिलकर अहम स्तंभ के तौर पर काम किया है.

 

गृह मंत्री कहा कि NCRB ने एक मां की तरह न केवल प्रेरित किया है, बल्कि क्षमता निर्माण के लिए हर राज्य की पुलिस फोर्स को ट्रेनिंग भी दी है. इसका नतीजा यह है कि नये कानूनों के लागू होने के बाद आज देश भर के हर पुलिस स्टेशन में बिना किसी शिकायत के काम सुचारू रूप से चल रहा है,

 

चाहे सत्ता में कोई भी राजनीतिक दल हो. यह फिंगरप्रिंट कॉन्फ्रेंस फिंगरप्रिंट साइंस, NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) के ट्रेनिंग फ्रेमवर्क, मैनपावर, आधुनिक तकनीक और दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए इस पूरे सिस्टम का इस्तेमाल कैसे किया जाये. इन विषयों पर मंथन कर रही है.

 

अमित शाह ने कहा, आज़ादी के बाद जैसे-जैसे हम आगे बढ़े, अपराध नियंत्रण में पुलिस स्टेशन की भूमिका को पहचाना जाने लगा. जांच शुरू हुई, अपराधी पकड़े गये और अपराधियों को कोर्ट में पेश करने और जेल ले जाने तक की पूरी प्रक्रिया में पुलिस स्टेशन का काफी नियंत्रण और प्रभाव रहा. 

 

अब समय आ गया है कि हम आपराधिक न्याय प्रणाली को देश के हर नागरिक के लिए एक ऐसा प्रभावी साधन बनाएं जिससे उन्हें हमारे संविधान द्वारा दिए गए अधिकार मिल सकें

 

उन्होंने कहा, अगर किसी के अधिकारों का उल्लंघन होता है, चाहे वह शरीर, संपत्ति या सम्मान से जुड़ा हो. तो हमारे संविधान ने इन तीनों की रक्षा का अधिकार दिया है. अगर कहीं भी इन अधिकारों का उल्लंघन होता है और अपराधी को सालों तक सज़ा नहीं मिलती है, तो मेरा मानना है कि यह पूरी व्यवस्था ही अन्यायपूर्ण है.

 

अमित शाह ने कहा, हमने अगस्त 2019 में इस समस्या को दूर करने के लिए एक अभियान शुरू किया था, जिसका मकसद आपराधिक न्याय प्रणाली के कानूनों में पूरी तरह से बदलाव लाना, उन्हें आधुनिक समय के अनुकूल बनाना, आधुनिक विज्ञान और तकनीक को एक ज़रूरी हिस्से के तौर पर शामिल करना और यह सुनिश्चित करना था कि FIR अपने तार्किक नतीजे तक पहुंचे और अपराधी को तीन साल के भीतर सज़ा हो.

 

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