Ranchi : चुनाव से पहले मुफ्त योजनाओं की घोषणा देश के आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकता है. यह राष्ट्रहित में नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने तामिलनाडु पावर ड्रिस्ट्रिब्यूशन कंपनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की.
साथ ही तामिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया. तामिलनाडु डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी ने बिल संशोधन नियम 24 में किये गये प्रावधान को चुनौती दी थी. इस नियम में मुफ्त बिजली की योजना को शामिल किया गया था.
डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी की ओर से दायर याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश विपुल पंचोली की पीठ में याचिका की सुनवाई हुई.
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य एक कल्याणकारी इकाई है. गरीबों को राहत देना राज्य का काम है. लेकिन चुनाव से पहले मुफ्त योजनाओं की घोषणा ठीक नहीं है.
न्यायालय ने कहा कि राज्य को अपनी आमदनी शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना आदि पर खर्च करना चाहिए. चुनाव पूर्व मुफ्त योजनाओं पर नहीं. जो सक्षम हैं, उनसे कीमत वसूली जानी चाहिए. जो कमजोर हैं, उन्हें राहत दी जानी चाहिए.
सरकार को मुफ्त योजनाओं के बदले रोजगार सृजन पर ध्यान देना चाहिए, ताकि लोक सम्मानपूर्वक अपनी जिंदगी गुजार सकें. अगर सरकार मुफ्त भोजन, मुफ्त बिजली, मुफ्त गैस और नकद राशि देगी, तो लोग काम करना क्यों सीखेंगे.
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