Ranchi News: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (NPU) पलामू के VC दिनेश सिंह ने उत्तर प्रदेश की कंपनी को बिना टेंडर के ही प्रिटिंग का काम दिया. इसके बाद उससे 37 लाख रुपये की लागत पर छात्रों को बांटी जाने वाली डिग्रियां छपवायीं. VC ने इस काम को मनपसंद परीक्षा नियंत्रक और ओएसडी की मदद से अंजाम दिया. साथ ही स्पेशल ऑडिट टीम को इससे जुड़ी फाइल नहीं दी.
उत्तर प्रदेश के प्रिंटर ने परीक्षा निंयत्रक को संबोधित ऑफर लेटर दिया था. इसकी प्रति कुलपति को भी दी गयी थी. परीक्षा नियंत्रक अजीत सेठ ने ऑफर लेटर कुलपति को अनुमोदित नहीं किया. कुलपति ने ही अपने ऑफर लेटर को परीक्षा नियंत्रक के OSD गौरव कुमार को अनुमोदित किया. गौरव कुमार को भेजे गये ऑफर लेटर पर फाइल तैयार की गयी और बिना टेंडर के नॉमिनेशन पर ही उत्तर प्रदेश के प्रिंटर को डिग्रियां प्रिंट करने का काम दे दिया गया.
सिर्फ इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश के प्रिंटर को नॉमिनेशन पर प्रिंटिंग का काम देने के बाद उसके साथ एकरारनामा भी सादे कागज पर कर लिया गया. विश्वविद्यालय के इतिहास में सादे कागज पर एकरारनामा करने की यह पहली घटना है. सरकार द्वारा निर्धारित नियम के तहत किसी काम के लिए एकरारनामा करने की प्रक्रिया निर्धारित है. सादे कागज पर किया गया एकरारनामा कानूनी रूप से वैध नहीं है.
विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह 6-10-2025 को आयोजित किया गया था. लेकिन दीक्षांत समारोह के लिए डिग्रियां छपवाने का फैसला 19 नवंबर 2025 को हुई परीक्षा बोर्ड की बैठक में लिया गया. इस प्रकरण की सबसे मजेदार बात यह कि डिग्रियां छपवाने के लिए प्रिंटर के साथ 13 अगस्त को ही एकरारनामा कर लिया गया था.
सादे कागज पर किये गये एकरारनामे के सहारे प्रिंटर ने 37 लाख रुपये की डिग्रियां छापकर विश्वविद्यालय को दी. साथ ही किराया के रूप में 1.20 लाख रुपये का चार्ज किया. बिना टेंडर काम देने और डिग्रियां छपवाने के बाद अब कुलपति उसका भुगतान कराने की कोशिश में लगे हुए हैं.
विश्वविद्यालय में प्रश्न पत्रों की छपायी को गोपनीय रखने का प्रावधान है. लेकिन डिग्रियों की छपायी में गोपनीयता का प्रावधान नहीं है. डिग्रियों की छपायी के लिए सेल-परचेज कमेटी, वित्त समिति सहित अन्य वैधानिक समितियों की सहमति के बाद टेंडर प्रकाशित कर प्रिंटर का चुनाव करने का नियम है. लेकिन कुलपति ने इस नियम का उल्लंघन कर अपने मनपसंद लोगों के सहारे उत्तर प्रदेश के प्रिंटर को डिग्रियां प्रिंटिंग का काम दे दिया.
इस काम में परीक्षा नियंत्रक अजीत सेठ और OSD ने मदद की. कुलपति ने अजीत सेठ को राज्यपाल की सहमति के बिना ही परीक्षा नियंत्रक के रूप में नियुक्त कर लिया. इसके लिए राज्यपाल के अनुमोदन के बाद नियुक्त परीक्षा नियंत्रक को समय से पहले हटा दिया.
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