Ranchi : झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) समेत देश के अन्य शिक्षा बोर्डों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों की डिजिटल पहचान अनिवार्य कर दी है. अब वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षाओं में केवल उन्हीं छात्रों को लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स (LOC) में शामिल किया जाएगा, जिनके पास 12 अंकों की APAAR ID और परमानेंट एजुकेशन नंबर (PEN) होगा.
हालांकि, प्रशासन ने आधार कार्ड में त्रुटियों और तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए छात्रों को एक साल की अतिरिक्त मोहलत दी है. इसके बावजूद नए शैक्षणिक सत्र से पंजीकरण प्रक्रिया में सख्ती बढ़ा दी जाएगी.
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य के पलामू सहित कई जिलों में करीब 80 प्रतिशत छात्र-छात्राओं की डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जा चुकी है. बाकी 20 प्रतिशत छात्रों के डेटा में सुधार के लिए यू-डायस (U-DISE) पोर्टल पर तेजी से काम चल रहा है.
इस डिजिटल व्यवस्था से छात्रों को भविष्य में JEE मेन, NEET और CUET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के आवेदन में आसानी होगी. साथ ही दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया भी सरल और तेज हो जाएगी.
क्या है APAAR ID?
APAAR ID (Automated Permanent Academic Account Registry) केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विकसित किया गया है. यह एक डिजिटल लॉकर की तरह काम करती है, जिसमें छात्र के शैक्षणिक प्रमाणपत्र, उपलब्धियां और रिकॉर्ड एक ही जगह सुरक्षित रहते हैं, चाहे छात्र स्कूल बदले या उच्च शिक्षा में जाए. अतिरिक्त समय मिलने से उन छात्रों को राहत मिली है, जिनके आधार या अन्य सरकारी दस्तावेजों में नाम, जन्मतिथि जैसी त्रुटियां थीं.
PEN बनेगा स्थायी शैक्षणिक पहचान
शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किया जाने वाला परमानेंट एजुकेशन नंबर (PEN) छात्र की पूरी शैक्षणिक यात्रा के दौरान एक स्थायी पहचान के रूप में काम करेगा. यह यू-डायस पोर्टल के माध्यम से संचालित होता है और छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को ट्रैक करने में मदद करता है.
स्कूलों को अब कक्षा 9वीं से ही छात्रों का पंजीकरण और डिजिटल प्रोफाइल तैयार करना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि 2027 की बोर्ड परीक्षाओं तक सभी विद्यार्थियों का डेटा पूरी तरह अपडेट और व्यवस्थित हो सके.
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