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माफी स्वीकार नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने NCERT निदेशक को तलब किया, गुस्से में कहा, न्यायपालिका लहूलुहान है

  • सुनवाई के क्रम में आज CJI सूर्यकांत काफी गुस्से में नजर आये.
  • न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है,इस पहलू को रेखांकित नहीं किया गया.
  • कल रात एनसीईआरटी ने माफी मांग ली थी, लेकिन सुनवाई में इससे कोई फर्क नहीं पड़ा

New Delhi : नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग  (NCERT) की 8वीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का चैप्टर शामिल करने के मामले में आज गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.

 

 
इससे पूर्व कल रात एनसीईआरटी ने माफी मांग ली थी, लेकिन सुनवाई में इससे कोई फर्क नहीं पड़ा. सुनवाई के क्रम में आज CJI सूर्यकांत काफी गुस्से में नजर आये.  


सीजेआई सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच के सामने आज एनसीईआरटी ने बिना शर्त माफी मांगी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने माफी स्वीकार नहीं की.


सीजेआई ने फटकार लगाते हुए  NCERT के निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया. साथ ही कहा कि हम यह कार्यवाही नहीं बंद कर रहे हैं. इसकी गहन जांच  करायी जायेगी. 

 

साथ ही कोर्ट ने सभी फिजिकल और डिजिटल प्लेटफॉर्म से तुरंत सभी कॉपियां हटाने के निर्देश दिये, कहा  कि आदेश का अनुपालन कर दो सप्ताह में रिपोर्ट फाइल करें.

 

सीजेआई ने कहा कि किताब के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. इस मामले में SC अगली सुनवा 11 मार्च को होगी.


एनसीईआरटी की ओर से पक्ष रखते हुए एसजी तुषार मेहता ने सीजेआई की बेंच के समक्ष कहा कि वे इस मामले में बिना शर्त माफी मांग रहे हैं. 


लेकिन सीजेआई सूर्यकांत ने मीडिया में छपी खबरों का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सेक्र्टरी जनरल यह जांच करेंगे कि ये खबर कैसे छपी? माना कि यह एक साजिश हो सकती है. सीजेआई ने गुस्से में कहा,  इस घटना से न्यायपालिका लहूलुहान है.
 

इस पर तुषार मेहता ने फिर दलील दी कि बाजार में गयी किताबें वापस ले ली गयी है. कोर्ट को बताया कि बाजार में  भेजी गयी 32 किताबें वापस ली जा रही है.  


सीजेआई ने उनकी दलील पर इसे कैलकुलेटेड मूव करार दिया, जिसमें भारतीय न्यायपालिका को भ्रष्ट बताया गया है. सीजेआई ने कहा कि शिक्षक समाज इसे ट्रोल कर रहा है. जस्टिस बागची ने कहा कि डिजिटल युग में एक किताब की हजारों प्रतियां प्रसारित हो गयी होगी. यह कैसे हुआ, यह जानना जरूरी है. 


चीफ जस्टिस सूर्यकांत कहा कि किताब में लंबित मामलों (pendency) पर Justice delayed is justice denied शीर्षक से एक चैप्टर है. हम यह नहीं पढ़ा सकते कि न्याय से इनकार हो रहा है. 


 सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने NCERT को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि  इसमें पूरे तंत्र की व्यापक समस्या का कोई जिक्र नहीं है, केवल एक व्यक्ति को चुन लिया गया है.
 

 सवाल उठाया कि इसमें राजनेताओं, नौकरशाही और मंत्रियों का क्या जिक्र है? कहा कि यह सामग्री पीडीएफ रूप में प्रसारित हो चुकी है. इस क्रम में जस्टिस बागची ने कहा कि यह सार्वजनिक डोमेन में हैं  


सरकार को टेकडाउन आदेश जारी करने चाहिए. टिप्पणी की कि न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है, लेकिन इस पहलू को कहीं रेखांकित नहीं किया गया है.

 

 

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