Ranchi : प्रकृति पर्व सरहुल को लेकर केंद्रीय सरना समिति ने सिरमटोली सरना स्थल पर बैठक आयोजित की. इस दौरान सरहुल पर्व को पारंपरिक रीति-रिवाज से मनाने का निर्णय लिया गया है और शोभायात्रा के दिन डीजे साउंड पर रोक लगाने की अपील की गई. इस मौके पर अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि सरहुल पूजा आदिवासी समाज का पवित्र पर्व है, प्रकृति की पूजा होती है.

इसके साथ ही यह पर्व सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है. सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि सरना धर्मावलंबी पारंपरिक वेशभूषा में शोभायात्रा में शामिल हों और झांकी के माध्यम से आदिवासी इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करें. सरहुल में डीजे का उपयोग न कर मांदर-ढोल जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों को प्राथमिकता दी जाए.
आदिवासी समाज सरहुल पर्व के बाद करते है नया फल फूल का ग्रहण –शिवा कच्छप
वहीं केंद्रीय सरना संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष शिवा कच्छप की अध्यक्षता में पिस्का मोड़ में बैठक हुई. इस दौरान कहा कि सरहुल को नव वर्ष के रूप में मनाते है, क्योंकि इस महीने में पेड़ो में नए पत्ते, फल फूल निकलना शुरू होते है. उसी की पूजा धर्मेश सिंग बोगा, चाला आयो, सरना मां का चरणो में अर्पित करते है. इसके बाद ही आदिवासी समाज नये फल फूल ग्रहण करना शुरू करते है.
मुख्यमंत्री से मांग की कि मौजा हेसल पिस्का मोड़ सत्यारी सरना स्थल को बचा ले, जिसपर दिनों-दिन कब्जा होते चला आ रहा है. पवित्र स्थल पर घेराबंदी नहीं होने के कारण गंदगी फैला रहे है. 21 अप्रैल को सरहुल शोभा यात्रा धूमधाम पारंपारिक रीति रिवाज ढोल नगाड़ा, मांदर, ढांक शहनाई बाजा के साथ निकाला जाएगा. शोभायात्रा का स्वागत हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कर किया जाए.
मौके पर महादेव उरांव, मनोज उरांव, चारो उरांव, जगरनाथ उरांव, किशोर भगत, सती तिर्की, अनिता उरांव, सिटीआ उरांव, वृद्धि उरांव, शोभा तिर्की इत्यादि शामिल रहे.
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