Search

 
 
 

अरूप चटर्जी ने केंद्र के चार लेबर कोड का किया विरोध, औद्योगिक नीति पर सरकार को घेरा

झारखंड विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान विधायक अरूप चटर्जी ने मजदूरों के हितों, श्रम कानूनों और राज्य की औद्योगिक स्थिति से जुड़े कई मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है और श्रम कानूनों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है.
 

Ranchi :  झारखंड विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान विधायक अरूप चटर्जी ने मजदूरों के हितों, श्रम कानूनों और राज्य की औद्योगिक स्थिति से जुड़े कई मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है और श्रम कानूनों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है.

 

अरूप चटर्जी ने केंद्र सरकार के चार लेबर कोड का विरोध करते हुए कहा कि इसे राज्य में लागू करने से पहले सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ विचार-विमर्श किया जाना चाहिए. कहा कि मजदूरों से जुड़े इतने महत्वपूर्ण फैसलों में श्रमिक संगठनों की राय लेना जरूरी है.

 

निरसा विधायक ने श्रम विभाग के अधीन विभिन्न समितियों के पुनर्गठन की मांग भी उठाई. उन्होंने कहा कि स्टेट लेबर एडवाइजरी बोर्ड और झारखंड बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड जैसी समितियां लंबे समय से पुनर्गठित नहीं की गई हैं.

 

उन्होंने इन समितियों में अधिक से अधिक ट्रेड यूनियनों को प्रतिनिधित्व देने की बात कही. साथ ही उन्होंने ट्रेड यूनियनों के पंजीकरण में होने वाली देरी और जटिल प्रक्रिया पर भी नाराजगी जताई.

 

अरूप चटर्जी ने मजदूरों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई उद्योगों में न्यूनतम मजदूरी, पहचान पत्र और ईएसआई जैसी बुनियादी सुविधाओं का पालन नहीं हो रहा है.

 

उन्होंने कहा कि जहां मजदूरों को लगभग 470 रुपये मिलना चाहिए, वहां उन्हें केवल 290 रुपये दिए जा रहे हैं और इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.

 

यह भी कहा कि श्रम विभाग के अधिकारियों और मंत्री को नियमित रूप से उद्योगों का औचक निरीक्षण करना चाहिए. उनके अनुसार कम से कम महीने में एक बार निरीक्षण होने से श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जा सकता है.

 

विधायक ने राज्य की औद्योगिक नीति पर भी सवाल उठाए. कहा कि सिंगल विंडो सिस्टम की चर्चा साल 2000 से की जा रही है, लेकिन वास्तविकता में यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पाई है.

 

उन्होंने दावा किया कि निरसा क्षेत्र में करीब 1000 करोड़ रुपये के निवेश के आवेदन लंबित हैं. लेकिन सरकार जमीन उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है.

 

चटर्जी ने  यह मुद्दा भी उठाया कि कई उद्योगों के लिए जमीन देने वाले लोगों को वर्षों बाद भी नौकरी नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोस्टील और मैथन पावर लिमिटेड को जमीन देने वालों को 10 से 15 साल बाद भी रोजगार नहीं मिला है.

 

इसके अलावा उन्होंने आईटीआई प्रशिक्षुओं से जुड़े मुद्दे पर भी चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि अप्रेंटिस ट्रेनिंग के पंजीकरण के नाम पर अधिकारियों द्वारा 400 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है.

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही