Sports News: एशियन गेम्स 2026 में भारत की पिंकी बल्हारा ने कुराश के विमेंस 78 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. हालांकि, सेमीफाइनल में उन्हें साउथ कोरिया की मो सुमिन के खिलाफ 0-5 से हार का सामना करना पड़ा.
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बता दें, पिंकी ने इससे पहले क्वार्टर फाइनल में एक और साउथ कोरियाई खिलाड़ी लिम को 3-0 से हराया था. पिंकी बलहारा का ये एशियन गेम्स में लगातार दूसरा सिल्वर मेडल रहा. 2018 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था.
कुराश खेल क्या है?
कुराश मध्य एशिया की एक पारंपरिक मार्शल आर्ट और जैकेट रेसलिंग मिला-जुला रूप है. जिसकी जड़ें आधुनिक उज्बेकिस्तान के क्षेत्र की मानी जाती हैं. पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों में भी होता था. इसमें खिलाड़ी खड़े रहकर अपने प्रतिद्वंद्वी को दांव लगाकर मैट पर गिराने की कोशिश करता है.
कुश्ती से कितना अलग है कुराश?
कुराश देखने में कुश्ती जैसा लगता है, लेकिन इसके नियम काफी अलग हैं. इसमें खिलाड़ी मुकाबला खड़े होकर ही खेलता है. जिसमें शरीर के निचले भाग का उपयोग नहीं किया जा सकता. इस खेल में कमर के नीचे के हिस्से को ना तो पकड़ा जाता है और ना ही हिट किया जा सकता.
खिलाड़ी को अपने विरोधी को ग्रांउड पर गिराना होता है. जैसे ही कोई खिलाड़ी मैट पर गिरता है, एक्शन रोक दिया जाता है और मुकाबला फिर खड़े होकर शुरू होता है.
अगर वह खिलाड़ी अपने विरोधी को मजबूत तरीके से थ्रो करता है और पीठ के बल गिराता है. तो उसे खलोल कहा जाता है. यदि खिलाड़ी विरोधी को उसे की तरफ गिरा देता है तो उसे योनबोश पॉइंट दिया जाता है. 2 योनबोश को एक खलोल माना जाता है. मुकाबलें में सबसे छोटे अंक को चाला कहा जाता है.
अगर वह खिलाड़ी अपने विरोधी को मजबूत तरीके से थ्रो करता है तो उसे खलोल कहा जाता है. और वह उस बाउट का विजेता बन जाता है. इस खेल में पुरुष का मुकाबला 4 मिनट और महिलाओं का 3 मिनट का होता है. यदि खिलाड़ी विरोधी को उसे की तरफ गिरा देता है तो उसे योनबोश पॉइंट दिया जाता है. 2 योनबोश को एक खलोल माना जाता है. मुकाबलें में सबसे छोटे अंक को चाला कहा जाता है.
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