New Delhi : यूपीआई के जरिये 2000 से ज्यादा के भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने फिलहाल इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.
साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), NPCI और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. (देश-विदेश से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)
सरकार के फैसले की कानूनी वैधता की जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में यूपीआई पेमेंट पर लगाए गए एमडीआर शुल्क की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि जनवरी 2020 से लागू जीरो-MDR व्यवस्था में बदलाव पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना किया गया.
याचिका में 2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर लगाए जाने वाले MDR के फैसले की कानूनी वैधता की जांच की मांग की गई है. गौरतलब है कि NPCI ने 15 अक्टूबर से 2,000 से अधिक के कुछ चुनिंदा व्यापारी UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का फैसला किया है.
सामान्य तौर पर इस तरह के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क तय किया गया है. वहीं, 75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रखी गई है. हालांकि, यह शुल्क हर UPI भुगतान पर लागू नहीं होगा. एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा.
इसे भी पढ़ें
छोटे कारोबारियों को शुल्क से छूट
नई व्यवस्था में छोटे व्यापारियों के लिए भी राहत का प्रावधान रखा गया है. UPI QR के जरिए हर महीने 1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों से MDR नहीं लिया जाएगा. वहीं, रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे कुछ क्षेत्रों में 2,000 से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का निश्चित शुल्क निर्धारित किया गया है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

