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असम के आदिवासियों को मिलना चाहिए संवैधानिक अधिकार: CM हेमंत सोरेन

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को सोशल मीडिया के जरिए असम के आदिवासियों का मुद्दा उठाया. एक्स पर पोस्ट जरिए इसे राष्ट्रीय स्तर का अन्याय बताया. उन्होंने कहा कि असम के चाय बागानों में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी समाज को आज तक अनुसूचित जनजाति (ST) का संवैधानिक दर्जा नहीं मिला है, जो बेहद गंभीर विषय है.
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Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को सोशल मीडिया के जरिए असम के आदिवासियों का मुद्दा उठाया. एक्स पर पोस्ट जरिए इसे राष्ट्रीय स्तर का अन्याय बताया. उन्होंने कहा कि असम के चाय बागानों में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी समाज को आज तक अनुसूचित जनजाति (ST) का संवैधानिक दर्जा नहीं मिला है, जो बेहद गंभीर विषय है.

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हेमंत सोरेन ने कहा कि अंग्रेजों के समय इन लोगों को उनके घरों से दूर लाकर असम में बसाया गया और उन्होंने अपने खून-पसीने से वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया. इसके बावजूद आज तक उन्हें उनके अस्तित्व की मान्यता नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन इस समाज की स्थिति नहीं बदली.

 

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर क्यों इतने बड़े समाज को अब तक उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित रखा गया है. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और पहचान का सवाल है.

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के आदिवासी समाज को अब और इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए. उन्हें उनका पूरा संवैधानिक अधिकार और सम्मान मिलना ही चाहिए. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब तक न्याय अधूरा है, तब तक लोकतंत्र भी अधूरा रहेगा.

 

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