Ranchi : ग्रामीण विकास विभाग के सहायक अभियंता राम पुकार राम ने एक सचिव के घर पर कमीशन का 1.30 करोड़ रुपये पहुंचाया था. यह रकम उस सचिव के घर पर पहुंचायी गयी थी, जिसने अपना टेंडर में वसूले गये कमीशन में अपना हिस्सा 0.65% से बढ़ा कर 1% कर लिया था.
कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार ने भी सचिव के घर पर एक बार 50 लाख और दूसरी बार 12 लाख रुपये पहुंचाया था. कमीशन में सचिव की हिस्सेदारी बढ़ाने और सचिव के घर पर नोटों से भरा बैग पहुंचाने से संबंधित तथ्यों का उल्लेख तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार राम, कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार और सहायक अभियंता राम पुकार राम ने ईडी को दिये गये बयान में किया है.
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वीरेंद्र राम ने अपनी गिरफ्तारी के बाद PMLA की धारा 50 के तहत ईडी में अपना बयान दर्ज कराया था. उन्होंने अपने बयान में विभाग में टेंडर के दौरान कमीशन की वसूली और उसके बंटरावे से संबंधित जानकारी दी थी. अपने बयान मे उन्होंने कहा था कि मंत्री आलमगीर आलम को उनके आप्त सचिव संजीव लाल के माध्यम से कमीशन की राशि में 1.35% हिससा दिया जाता था.
मुख्य अभियंता को 0.50% हिससा मिलता था. कार्यपालक अभियंता, तकनीकी सचिव सहित अन्य अधिकारियों के बीच 0.40% कमीशन में हिस्सेदारी दी जाती थी. कमीशन की राशि में विभागीय सचिव की हिस्सेदारी 0.65% थी. लेकिन एक विभागीय सचिव ने अपने कार्यकाल के दौरान अपनी हिस्सेदारी 0.65% से बढ़ा कर 1% कर ली थी.
ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर के दौरान कमीशन वसूली और उसमें हिस्सेदार के मुद्दे पर सहायक अभियंता राम पुकार राम से कई बार पूछताछ हुई. हर बार पूछताछ के दौरान वह पहले दिये गये अपने बयान पर कायम रहे. राम पुकार राम द्वारा लिखे गये “हिसाब-किताब” का जो दस्तावेज मिला था, उसमें To me और To Saheb दर्ज था.
पूछताछ के दौरान राम पुकार राम ने To Saheb का अर्थ मंत्री बताया. मंत्री के हिस्से का कमीशन वीरेंद्र राम के पास पहुंचाने की बात स्वीकार की. लेकिन To me का उल्लेख करते हुए ख़ुद अपना हिससे का कमीशन लेने से इंकार किया.
राम पुकार राम ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने मंत्री के हिस्से के कमीशन का 3.37 करोड़ रुपये वीरेंद्र राम के घर पर पहुंचाने की बात मानी. साथ ही यह कहा कि उन्होंने खुद 1.30 करोड़ रुपये विभागीय सचिव के घर पर पहुंचाया था. सचिव के घर पर पहुंचायी गयी इस रकम में सिद्धनाथ कुमार और रमेश ओझा द्वारा वसूली गयी कमीशन की राशि भी शामिल थी.
बाद में हुई पूछताछ के दौरान वीरेंद्र राम के निर्देश पर हजारीबाग, जामताड़ा, देवघर और बोकारो जिले के ठेकेदारों से 8-10 करोड़ रुपये कमीशन वसूलने की जानकारी दी. साथ ही अपने पहले दिये गये बयान को फिर दोहराया. वह दूसरे इंजीनियरों के तरह अपने पहले के बयान से नहीं मुकरे.
दूसरी बार उन्होंने खुद मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के घर पर कमीशन का 3.37 करोड़ रुपये पहुंचाया था. इसके अलावा सचिव के घर पर 1.30 करोड़ रुपये पहुंचाने की बात भी स्वीकार की. कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार ने भी PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज कराये गये बयान में कमीशन वसूलने और मुख्य अभियंता और सचिव के घर पर इसे पहुंचाने की बात स्वीकार की है.
अनिल कुमार ने इडी को दिये गये अपने बयान मे कहा कि वीरेंद्र राम के निर्देश पर उन्होंने 50 करोड़ रुपये के टेंडर में से दो करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर वसूला था. इसमें से मां तारा कंस्ट्रक्शन से जामताड़ा में ब्रिज के काम के बदले 15 लाख रुपये वसूला था. ब्रिज के ही काम में इफ्तेखार खान से 20 लाख रुपये और साहिबगंज में ब्रिज के काम के बदले ABC कंस्ट्रक्शन से 15 लाख रुपये वसूला गया शामिल है.
वीरेंद्र राम के निर्देश पर वह खुद नोटों से भरा बैग वीरेंद्र राम के घर पहुंचा दिया था. साथ ही वीरेंद्र राम के निर्देश पर नोटों से भरा बैग सचिव के घर पर पहुंचाया था. इस बैग में 50 लाख रुपये थे. दूसरी बार उन्होंने सचिव के घर पर कमीशन का 12 लाख रुपये पहुंचाया था.



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