Lagatar Desk : केंद्र की सरकार ने UPI से पेमेंट लेने पर चार्ज लगाने का आदेश जारी कर दिया है. किसे कितना चार्ज देना पड़ेगा? इसका बोझ किस पर आयेगा? इन बातों को लेकर जबरदस्त तरीके का कंफ्यूजन है. लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि यह यूपीआई चार्ज का पूरा खेल है क्या? इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं.
- अगर दो लोग आपस में पैसे का लेन-देन कर रहे हैं, तो उन पर चार्ज (Merchant Discount Rate = MDR) नहीं लगेगा (भले ही कितना बड़ा अमाउंट हो).
- दो हजार रुपए से कम के किसी भी तरह के ट्रांजेक्शन (पेमेंट करने या पेमेंट लेने) पर चार्ज नहीं लगेगा.
- छोटे वेंडर्स, दुकानदार, ठेला वाला, फुटपाथ दुकानदार, जो महीने में गल्ले में एक लाख रुपए तक यूपीआई से लेते हैं, उनको कुछ पैसा नहीं देना है. लेकिन एक लाख से ज़्यादा पेमेंट होते ही चार्ज लगेगा.
- दुकानदार को किए गए 2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा. मतलब यह भुगतान अंततः ग्राहकों या यूं कहें आम लोगों को ही करना पड़ेगा.
- 75,000 या उससे अधिक के एक ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम 300 होगा.
- रेलवे, मोबाइल-टेलीकॉम, बीमा, पेट्रोल-डीजल और खेती के सामान जैसे क्षेत्रों में 2,000 से ऊपर के भुगतान पर 5 रुपये का तय MDR होगा.
- म्यूचुअल फंड, शेयर और स्टॉक ब्रोकर से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा. इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी.
ये तो शर्ते हैं और सरकार अभी यह वादा कर रही है, भरोसा दिला रही है कि कोई भी चार्ज कस्टमर को नहीं देना पड़ेगा, बैंकों को निर्देश दे दिए गए हैं. आम लोगों के लिए मुफ्त UPI इस्तेमाल पर कोई मासिक कोटा या ट्रांजैक्शन की संख्या वाली सीमा नहीं होगी. बैंकों और NPCI की रोजाना ट्रांजैक्शन लिमिट बनी रहेगी. यह सुरक्षा के लिए है, शुल्क लगाने की सीमा नहीं.
लेकिन बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या कोई भी दुकानदार, जिसे आम लोग यूपीआई से पेमेंट करेंगे, वह इस बोझ को क्यों उठायेगा. अभी जिस तरह क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर एक से दो प्रतिशत तक अलग से लिया जाता है, क्या उसी तरह से दुकानदार ग्राहकों से नहीं लेने लगेंगे. अगर वह ऐसा नहीं करेंगे, तो चार्ज बैंक लेगी, वह दुकानदार के मुनाफे से जायेगा. इसलिए पूरा बोझ आम लोगों पर ही पड़ेगा.
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