एमडीओ एटी देवप्रभा पर आरोप है कि उसने सरकारी और फॉरेस्ट लैंड का अतिक्रमण कर कोयला खनन किया. इतना ही नहीं कंपनी ने धनबाद जिला के फॉरेस्ट लैंड पर ओवर बर्डेन (ओबी) गिराकर पेड़-पौधों को नष्ट कर दिया है. कंपनी पर रैयतों को मुआवजा नहीं देने का भी आरोप है. रैयतों की अनुमति के बिना भी खनन काम कर ले रहा है.
कंपनी पर लगे आरोपों के मद्देनजर विधानसभा ने एक समिति बनाकर जांच कराने का फैसला लिया. विधानसभा में विधायक मथुरा प्रसाद महतो के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया. समिति में विधायक अरुप चटर्जी, राज सिन्हा, उमाकांत रजक, चंद्र महतो, सुदीप गुधिया और धनंजय सोरेन को शामिल किया गया.
विधानसभा की समिति ने 19-20 सितंबर को धनबाद के सुरुंगा, पहाड़ीगोडा, जीनागोड़ा, नुनुडीह, महुलबनी, भौंरा, गौखूंटी, रसियाबाद और केशलपुर क्षेत्र में जाकर शिकायतों की जांच की. ये सभी क्षेत्र बलियापुर और झरिया अंचल में पड़ता है. समिति के साथ धनबाद जिला प्रशासन के अधिकारी, बीसीसीएल व एटी देवप्रभा कंपनी के प्रतिनिधि मौजूद थे.
विधानसभा की विशेष समिति ने जांच में पाया है कि एटी देवप्रभा कंपनी पर लगे आरोप सही हैं. धनबाद जिला स्थित बीसीसीएल क्षेत्र संख्या-10, जीनागोड़ा एनटीएसटी में एटी देवप्रभा द्वारा मनमाने तरीके से खनन का काम किया जा रहा है. ओबी डंपिंग से जुड़े आरोपों को भी समिति ने सही पाया है.
स्थल निरीक्षण और ग्रामीणों से बातचीत के दौरान समिति ने पाया कि बलियापुर अंचल के सुरूंगा में रैयती एवं सरकारी जमीन पर ओबी डंप किया जा रहा है. इस पर रोक लगाने और संबंधित एमडीओ कंपनी (देवप्रभा) के ब्लास्टिंग और उत्खनन कार्य को जांच पूर्ण होने तक अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्देश दिया गया है.
आरोपों को सही पाने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट विधानसभा को सौंप दी है. विधानसभा के संयुक्त सचिव ने 16 अक्टूबर को धनबाद के डीसी को पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है कि एटी देवप्रभा कंपनी द्वारा किये जा रहे खनन और ओबी डंपिंग के काम को अस्थायी रुप से रोक दिया जाये. साथ ही अमीन की नियुक्ति करके खनन व ओबी डंपिंग की जमीन की मापी कराकर कार्रवाई की जाये.
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