Dumka : संताल परगना के जनजातीय इलाकों में भूमि अधिग्रहण और अधिकारों के कथित हनन को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि कॉरपोरेट-राज्य गठजोड़ के जरिए आदिवासियों की जल-जंगल-जमीन पर सुनियोजित हमला किया जा रहा है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
पार्टी के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में प्रभावित गांवों का दौरा किया. टीम में सुरजीत सिन्हा, सुभाष हेम्ब्रम, अमल आजाद और देवी सिंह पहाड़िया शामिल थे.
दौरे के बाद पार्टी ने गंभीर आरोप लगाए कि जिला प्रशासन और एमडीओ स्थानीय दलालों के साथ मिलकर वनाधिकार अधिनियम पेसा अधिनियम और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम का उल्लंघन कर रहे हैं. बिना ग्राम सभा की अनुमति के भूमि सर्वेक्षण और अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी तरह असंवैधानिक बताया गया है.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि क्षेत्र में वनाधिकार के कई दावे वर्षों से लंबित हैं. बावजूद इसके, लंबित मामलों का निपटारा किए बिना विस्थापन की तैयारी की जा रही है. पार्टी ने आरोप लगाया कि ग्राम सभाओं की भूमिका को दरकिनार कर ग्रामीणों पर दबाव बनाया जा रहा है.
आंदोलन की रणनीति तय
ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि 10 दिनों के भीतर ग्राम सभाएं आयोजित कर ‘वन अधिकार समिति’ का गठन किया जाएगा और नए दावों का पंजीकरण होगा. ग्राम सभाओं के प्रस्तावों को राज्यपाल, राष्ट्रपति और उच्च न्यायालय को भेजने की तैयारी है. साथ ही संगठनात्मक स्तर पर एक उपसमिति बनाई गई है, जो पूरे आंदोलन और कानूनी प्रक्रिया की निगरानी करेगी.
मई में होगा बड़ा प्रदर्शन
सीपीआईएम ने घोषणा की है कि मई 2026 के तीसरे सप्ताह में दुमका स्थित आयुक्त कार्यालय के समक्ष हजारों ग्रामीणों की भागीदारी के साथ विशाल प्रदर्शन किया जाएगा. इसकी अंतिम रणनीति 10 मई को होने वाली जिला कमेटी की बैठक में तय होगी.
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