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झारखंड से आदिवासियों की राजनीतिक भागीदारी खत्म करने के हो रहे प्रयास : आदिवासी प्रतिनिधि

Ranchi News : विभिन्न आदिवासी संगठनों ने परिसीमन के जरिए आदिवासियों की आरक्षित सीटों में कमी किए जाने की आशंका जतायी है. गुरुवार को सिरमटोली सरना स्थल पर संवाददाता सम्मेलन किया गया. इसमें केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग, लक्ष्मीनारायण मुंडा, राजेश लिंडा और कृष्णा लोहरा समेत अन्य लोग मौजूद रहे.
 
आदिवासी प्रतिनिधि बैठक करते हुए
  • परिसीमन के विरोध में 30 अगस्त को मोरहाबादी में आदिवासी एकता महाजुटान महारैली

Ranchi News : विभिन्न आदिवासी संगठनों ने परिसीमन के जरिए आदिवासियों की आरक्षित सीटों में कमी किए जाने की आशंका जतायी है. गुरुवार को सिरमटोली सरना स्थल पर संवाददाता सम्मेलन किया गया. इसमें केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग, लक्ष्मीनारायण मुंडा, राजेश लिंडा और कृष्णा लोहरा समेत अन्य लोग मौजूद रहे.

 

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वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन की आड़ में आदिवासियों की आरक्षित विधानसभा और लोकसभा सीटों को कम करने का प्रयास किया गया तो इसका जोरदार विरोध किया जाएगा. उन्होंने कहा कि देश में जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होना है तो आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण के प्रावधानों को भी ध्यान में रखना होगा. आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी आबादी के अनुपात में सीटों की संख्या बढ़नी चाहिए, न कि घटनी चाहिए.


75 साल में बदल रही आदिवासी गांवों की डेमोग्राफी

सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि संविधान निर्माण के दौरान आदिवासियों की जमीन और अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई संवैधानिक प्रावधान किए गए थे. इसके बावजूद सरकारी व्यवस्था और कानूनों के उल्लंघन के कारण आदिवासी क्षेत्रों की डेमोग्राफी बदल रही है. पिछले 75 वर्षों में झारखंड के आदिवासी गांवों में गैर-आदिवासियों की आबादी लगातार बढ़ी है.

 

अनुसूचित क्षेत्रों में चिह्नित गांवों में भी आदिवासी आबादी के बीच गैर-आदिवासियों की संख्या बढ़ रही है. सीएनटी और एसपीटी एक्ट जैसे कानूनों के बावजूद आदिवासी जमीन और अधिकारों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है.

 

परिसीमन को बताया राजनीतिक हकमारी

ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि झारखंड का निर्माण आदिवासियों के पूर्वजों के बलिदान और संघर्ष के बाद हुआ. पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी क्षेत्रों को विशेष संवैधानिक संरक्षण दिया गया है. इसके बावजूद विधानसभा और लोकसभा में अनुसूचित क्षेत्रों के आदिवासियों के राजनीतिक अधिकारों की लगातार हकमारी हुई है.

 

आज भी इन क्षेत्रों के आदिवासियों को अपेक्षित न्याय नहीं मिला. उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन होता है तो आदिवासी आबादी के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए.

 

सीटें कम हुईं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि 30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में होने वाली महारैली में विभिन्न जिलों से आदिवासी समाज के लोग जुटेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि परिसीमन के कारण आदिवासियों की आरक्षित सीटों की संख्या कम की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा.

 

केंद्र सरकार आदिवासी हितों की अनदेखी कर रहे हैं. आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी को कमजोर करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी. संगठनों ने रैली को सफल बनाने के लिए विभिन्न जिलों में तैयारी शुरू कर दी है.

 

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