Jadugoda: यूसील नरवापहाड़ आवासीय कॉलोनी स्थित कम्युनिटी सेंटर में नए पेसा कानून को लेकर शुक्रवार को जागरूकता का कार्यक्रम का आयोजित किया गया. जिसमें पेसा एक्ट 1996 के तहत 23 नवंबर 2025 को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा पारित नए पेसा नियमावली को लेकर जानकारी दी गई. कार्यक्रम की अध्यक्षता नरवापहाड़ माझी बाबा वीरेन टुडू ने की. इस अवसर पर राजदोहा माझी बाबा माझी युवराज टुडू की भी प्रमुख भागीदारी हुई.
एक गांव में दो प्रधान
जागरूकता कार्यक्रम में नरवा पहाड़ से सटे विभिन्न गांवों से आए माझी बाबाओं एवं सामाजिक प्रतिनिधियों को पेसा एक्ट के प्रावधानों की जानकारी दी गई. वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से झारखंड के गांव में एक गंभीर विवाद बढ़ता जा रहा था, जिसमें एक ही गांव में दो ग्राम प्रधान चुने जाते थे.
पहला—एक प्रखंड प्रशासन द्वारा चयनित ग्राम प्रधान (सामान्य वर्ग से) व दूसरा ग्राम सभा द्वारा चयनित माझी बाबा (अनुसूचित जनजाति से). उन्होंने स्पष्ट किया कि पेसा एक्ट लागू होने के बाद यह विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है, क्योंकि पेसा एक्ट में साफ तौर पर उल्लेख है कि ग्राम का पारंपरिक प्रमुख मसलन माझी बाबा, मांकी, मुंडा, पहाड़ा राजा, पाहन आदि—ही ग्राम सभा का अध्यक्ष होगा और वही गांव का वास्तविक प्रमुख होगा.
नए पेसा एक्ट में कई खामियां
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा पारित नियमावली में कई गंभीर खामियां हैं, जो पेसा एक्ट और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध हैं. राज्य सरकार के पेसा एक्ट के तहत ग्राम सभा से योजना पारित होने के बावजूद पंचायत स्तर पर कार्यकारिणी समिति का गठन ग्राम सभा की सर्वोच्चता और संविधान के खिलाफ है.

जिला परिषद को मिला जिम्मा
वही 5–6 ग्रामों से संबंधित योजनाओं की जिम्मेदारी ग्राम सभा के बजाय जिला परिषद को सौंपा गया. जो पेसा एक्ट का घोर उल्लंघन है. उन्होंने बताया कि यदि कोई योजना ग्राम सभा से पारित नहीं होती है तो 60 दिनों के भीतर उपायुक्त द्वारा स्वयं उस योजना को पारित करने का प्रावधान है, जो पेसा एक्ट के स्पष्ट प्रावधानों के विरुद्ध है.
पारंपरिक सामाजिक तंत्र हुआ सीमित
उन्होंने आगे कहा कि सभी अनुसूचित जनजातियों की अपनी-अपनी सामाजिक व्यवस्था है, लेकिन नियमावली में ग्राम सभा के ऊपर मौजूद पारंपरिक सामाजिक तंत्र को केवल न्यायिक भूमिका तक सीमित कर दिया गया है, जबकि संस्कृति, धर्म, रीति-रिवाज और परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी उसी सामाजिक व्यवस्था की है.
ग्राम सभा की शक्तियां हुई कमजोर
उन्होंने जोर देकर कहा कि पेसा एक्ट 1996 स्पष्ट रूप से कहता है कि ग्राम सभा सर्वोच्च है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा नियमावली में किए गए अनेक फेरबदल ग्राम सभा की शक्तियों को कमजोर करती हैं. कार्यक्रम में झारखंड सरकार से नियमावली में आवश्यक संशोधन करने की जोरदार मांग की गई.
स्वशासन मजबूत करने का संकल्प
कार्यक्रम में पेसा एक्ट की रक्षा और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने का संकल्प लिया गया. सम्मेलन को वीरेन टुडू, सुशील हांसदा, मुखिया अनीता मुर्मू ,शंकर हेंब्रम ने भी संबोधित किया व आदिवासी रूढ़ि प्रथा के आधार ओर पेसा एक्ट लागू करने की मांग उठाई
कार्यक्रम में शामिल लोग
नरवा पहाड़ (जादूगोड़ा) जुगसलाई तोरोप पारगना- दसमत हांसदा, हल्दीपोखर तोरोप पारगना- सुशील हांसदा, देश गोडेत एवं काशिडीह माझी बाबा- सुसांतो हेंब्रम, पाथरचकडी़ पूड़सी माझी बाबा दासमत मुर्मू, गोविंदपुर पूड़सी माझी बाबा- कृष्णा हेंब्रम, डोमजुड़ी पंचायत मुखिया अनीता मुर्मू, हाड़तोपा माझी बाबा- पर्वत किस्कू, दामुडीह माझी बाबा- ठाकुर माझी, डोमजुड़ी माझी बाबा- जगन्नाथ मुर्मू, साथ ही गाजिया हांसदा, फुदन मार्डी, गुरुबारी सरदार, लक्ष्मी टुडू, माया मुर्मू, सोनिया माझी, चंपा मुर्मू, अनीता किस्कू सहित अनेक सामाजिक प्रतिनिधि व ग्रामीण शामिल हुए.
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