Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

रांची में विश्व ग्लूकोमा दिवस पर जागरूकता रैली व कार्यशाला का आयोजन

विश्व ग्लूकोमा दिवस के अवसर पर गुरुवार को सदर अस्पताल रांची में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस मौके पर प्रभात रैली निकाली गई और एक कार्यशाला भी आयोजित की गई
Advertisement
Advertisement

Ranchi : विश्व ग्लूकोमा दिवस के अवसर पर गुरुवार को सदर अस्पताल रांची में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस मौके पर प्रभात रैली निकाली गई और एक कार्यशाला भी आयोजित की गई. कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन रांची डॉ. प्रभात कुमार ने की.

 

कार्यक्रम के तहत प्रभात फेरी को सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. रैली में जिला स्तरीय पदाधिकारी, स्वास्थ्य कर्मी और एएनएम स्कूल की छात्राएं शामिल हुईं. रैली का उद्देश्य आम लोगों को ग्लूकोमा यानी काला मोतिया के प्रति जागरूक करना था.

 

Uploaded Image

 

इस वर्ष विश्व ग्लूकोमा दिवस का थीम ग्लूकोमा मुक्त विश्व के लिए एकजुट होना रखा गया है. कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि विश्व ग्लूकोमा सप्ताह 8 मार्च से 14 मार्च तक जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मनाया जा रहा है. 

 

उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा को आम भाषा में काला मोतिया कहा जाता है और इससे बचाव के लिए समय-समय पर आंखों की जांच जरूरी है. जिन लोगों को बीपी या शुगर की समस्या है उन्हें हर छह महीने में अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए.

 

सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचता है. नियमित नेत्र जांच और पौष्टिक आहार से इससे बचाव किया जा सकता है. 

 

इसके प्रमुख लक्षणों में धुंधली दृष्टि, तेज रोशनी के आसपास इंद्रधनुष जैसे घेरे दिखना, आंख और सिर में दर्द, उल्टी, धीरे-धीरे नजर कम होना और साइड विजन का खत्म होना शामिल है. उन्होंने कहा कि 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए.

 

नेत्र विशेषज्ञ सदर अस्पताल डॉ. प्रीतीश प्रणय ने बताया कि ग्लूकोमा में आंखों की ऑप्टिक नस प्रभावित होती है और आमतौर पर आंख के अंदर बढ़े दबाव के कारण यह समस्या होती है. इससे धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होने लगती है. 

 

उन्होंने बताया कि 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में इसका खतरा अधिक होता है, हालांकि यह बीमारी बच्चों और युवाओं को भी प्रभावित कर सकती है. यदि किसी परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास रहा है तो ऐसे लोगों को हर छह महीने में आंखों की जांच करानी चाहिए. उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा से होने वाली दृष्टि हानि स्थायी हो सकती है, इसलिए समय पर जांच और उपचार जरूरी है. काला मोतिया अंधापन का दूसरा सबसे बड़ा कारण माना जाता है.

 

डॉ. प्रिया ने बताया कि आंखों में चोट लगने, कुछ दवाओं के सेवन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी ग्लूकोमा विकसित हो सकता है. इसलिए समय-समय पर आंखों की जांच कराना जरूरी है.कार्यक्रम में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमरेंद्र कुमार, नेत्र विशेषज्ञ डॉ. प्रीतीश प्रणय, डॉ. प्रिया, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह सहित स्वास्थ्य कर्मी और एएनएम स्कूल की छात्राएं मौजूद थीं. सदर अस्पताल सहित जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ग्लूकोमा की जांच निःशुल्क की जा रही है.

 

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही