Ranchi: झारखंड के अलग-अलग जिलों में सरकारी कर्मियों के वेतन के नाम पर फर्जी निकासी की जांच की मांग जोर पकड़ रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया है. लेकिन विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को एक प्रेस बयान जारी कर पूरे मामले की सीबीआई या न्यायिक जांच कराने की मांग की है.
मरांडी ने आशंका जतायी है कि जिस तरह से यह मामला सामने आया है, उससे यह लगता है कि यह एक संगठित घोटाला है. ठीक उसी तरह से जिस तरह चारा घोटाले में डोरंडा ट्रेजरी से 140 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई थी. इसलिए इस घोटाले की जांच जरुरी है.
मरांडी ने छोटे पदाधिकारियों, खासकर एकाउंटेंट को गिरफ्तार कर जेल भेजने को संतोषप्रद कार्रवाई नहीं मानते हुए कहा है कि जिस तरह ई-कुबेर पोर्टल में छेड़छाड़ की बात सामने आ रही है, उससे यह पता चलता है कि इसमें कई सारे लोग शामिल हैं. उन्होंने डीडीओ पर कार्रवाई नहीं होने पर भी आश्चर्य व्यक्त किया है.
मरांडी ने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया है कि कैसे बोकारो जिला पुलिस के भ्रष्ट एकाउंटेंट कौशल पांडेय को पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता, आईजी पटेल मयूर कन्हैयालाल, डीआईजी नौशाद आलम और बोकारो एसपी ने प्रशस्ति पत्र दिया. उन्होंने अंदेशा जाहिर किया है कि ऐसा तो नहीं कि कौशल पांडेय को वरिष्ठ अफसरों का संरक्षण प्राप्त था.
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