Ranchi : झारखंड में JPSC परीक्षा घोटाले की CID जांच को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने CID जांच का दिखावा कर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया.
बाबूलाल ने सीधे CID के एडीजी और प्रमुख मनोज कौशिक को निशाने पर लेते हुए कहा कि जिस अधिकारी को मुख्यमंत्री ने पूरे JPSC घोटाले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी है, उनके कार्यकाल पर ही गंभीर सवाल उठते रहे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि जब मनोज कौशिक हजारीबाग के एसपी थे, उस दौरान कई बड़े घोटाले और अनियमितताएं हुई थीं, जिनकी जांच आज भी गृह मंत्रालय में लंबित है. ऐसे अधिकारी से निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है.
उन्होंने कहा कि पहले CID कुछ मामलों में बेहतर काम कर रही थी, लेकिन जिन अधिकारियों के नेतृत्व में कार्रवाई हो रही थी, उन्हें हटाकर अब पूरी जांच ऐसे अधिकारी को सौंप दी गई है, जिनके खिलाफ पहले से सवाल उठते रहे हैं. इससे युवाओं का जांच प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर होगा.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि JPSC मामले की जांच चल रही है, लेकिन केवल जांच का नाम लेने से न्याय नहीं मिलेगा. उन्होंने शराब घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा कि ACB ने डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई. इसका नतीजा यह हुआ कि आरोपी डिफॉल्ट बेल पर बाहर आ गए.
उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति JPSC घोटाले में भी रही तो राज्य की जनता और प्रतियोगी छात्र सरकार की जांच पर कैसे विश्वास करेंगे. सरकार को सबसे पहले JPSC परीक्षा रद्द करनी चाहिए और इस पूरे घोटाले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उन्हें सख्त सजा दिलानी चाहिए. मरांडी ने कहा कि झारखंड के लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है. उन्होंने सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की.
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