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बाबूलाल का CM को पत्र, स्वास्थ्य विभाग के टेंडर में हुई अनियमितता की कराएं उच्चस्तरीय जांच

स्वास्थ्य विभाग में टेंडर प्रक्रिया में हुई अनियमितता को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. पत्र में कहा है कि स्वास्थ्य विभाग की टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के साक्ष्य मिले हैं.
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Ranchi : स्वास्थ्य विभाग में टेंडर प्रक्रिया में हुई अनियमितता को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. पत्र में कहा है कि स्वास्थ्य विभाग की टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के साक्ष्य मिले हैं. 

 

उपलब्ध रिकॉर्ड और सार्वजनिक दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि सुनियोजित ढंग से प्रतिस्पर्धा को सीमित कर कुछ खास चुनिंदा लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया.

 

यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि शासन की पारदर्शिता और संवैधानिक सिद्धांतों पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है. इसलिए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच आवश्यक है.

 

एक ही परिवार की तीन कंपनियां

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ही परिवार ने एक ही पते पर तीन कंपनियां बनाकर पूरे घोटाले को अंजाम दिया. पूरे झारखंड में 11 जिलों के 11 टेंडरों को मैनेज करना केवल तभी संभव है जब यह पूरा खेल स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के संरक्षण में हुआ हो.

 

जेम पोर्टल की प्रक्रिया के क्लाउज 29 के अनुसार यदि एक व्यक्ति दो या अधिक कंपनियां बनाकर बिडिंग में हिस्सा लेता है, तो तकनीकी जांच के दौरान ही उसका टेंडर स्वतः निरस्त कर दिया जाना चाहिए. लेकिन यहां तो नियमों को उलटकर अयोग्य कंपनियों को ही योग्य घोषित कर भारी संख्या में टेंडर अवार्ड कर दिया गया.

 

यह गोरखधंधा बिना मंत्री के संरक्षण के संभव नहीं

इतने बड़े पैमाने पर यह गोरखधंधा बिना मंत्री के संरक्षण के संभव ही नहीं है. मंत्री इरफान अंसारी ने न केवल अपने विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, बल्कि जानबूझकर अपने खास लोगों को टेंडर बांटे.

 

उपरोक्त तीनों कंपनियां मात्र शेल कंपनियां हैं, जो सिर्फ दिखावे के लिए बनाई गई हैं. वास्तविक लाभार्थी स्वास्थ्य मंत्री से सीधे जुड़े कुछ दूसरे प्रभावशाली लोग हैं. इस मामले में एफआईआर करा कर पूरे प्रकरण की उच्च-स्तरीय निष्पक्ष जांच कराएं. दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

 

इन 11 टेंडर का दिया हवाला

1. GEM/2024/B/5748485 (सिविल सर्जन- दुमका) 
2. GEM/2024/B/5758754 (सिविल सर्जन- रांची) 
3. GEM/2025/B/5895644 (सिविल सर्जन- जामताड़ा)
4. GEM/2025/B/5919778 (सिविल सर्जन-जामताड़ा)
5. GEM/2025/B/5920544 (सिविल सर्जन- बोकारो)
6. GEM/2025/B/6012458 (सिविल सर्जन- बोकारो)
7. GEM/2025/B/6012441 (सिविल सर्जन- बोकारो)
8. GEM/2025/B/6013926 (सिविल सर्जन-दुमका)
9. GEM/2025/B/6017607 (सिविल सर्जन-देवघर)
10. GEM/2025/B/6021839 (सिविल सर्जन- सरायकेला खरसावां) 
11. GEM/2025/B/6022047 (सिविल सर्जन-जामताड़ा) 

 

नेता प्रतिपक्ष ने गिनाई अनियमितताएं

•    सभी 11 के 11 टेंडर सिर्फ तीन कंपनियों को दिए गए -Hind Infraproject Pvt-Ltd, M/s Bharat Art & Supplier और M/s Global Arts & Suppliers टेंडर्स बस चुनिंदा कंपनियों को देना कोई संयोग नहीं बल्कि हेर-फेर करने का एक सुनियोजित प्रयोग है.
•    इन तीनों कंपनियों का पता एक ही है - Irgu Road, Pahari Tola, Ranchi जो इनकी मिलीभगत और फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है. 
•    तीनों कंपनियों के निदेशक/प्रोप्राइटर एक ही परिवार के सदस्य हैं-ख्वाजा अब्दुल गुदिर अहमद बट, ख्वाजा मोहसिन अहमद और फरहान अहमद बट.
•    इनमें से ख्वाजा मोहसिन अहमद एक ही समय में दो कंपनियों के निदेशक/प्रोप्राइटर के रूप में दर्ज हैं, जो सभी टेंडरों को रद्द करने का सबसे बड़ा आधार हो सकता था. लेकिन चूंकि पूरा हेरफेर स्वास्थ्य मंत्री के संरक्षण में हुआ, इसलिए इन कंपनियों को हर बार 'टेक्निकली क्वालीफाई' घोषित कर दिया गया.
•    सभी टेंडरों में इन कंपनियों की बोलियों (रेट्स) में केवल कुछ हजार का अंतर पाया गया, जिससे स्पष्ट है कि दरें एक ही जगह से तय की गईं.
•    जब भी किसी चौथी कंपनी ने भाग लेने की कोशिश की, उसे तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित कर बाहर कर दिया गया. जो कंपनियां इस आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा ना रहीं हो उसे किसी भी तरह से पूरे चयन प्रक्रिया से ही बाहर कर दिया गया. 
•    मेडिकल क्षेत्र के जानकारों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कंपनियों को किए गए भुगतान बाजार में उपलब्ध समान और सुविधाओं की वास्तविक कीमत से कहीं अधिक हैं. पूरी प्रक्रिया में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की अनदेखी कर सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और बंदरबांट किया गया.
•    पूरी प्रक्रिया में जेम पोर्टल की नियमावली एवं प्रावधान का खुला उल्लंघन हुआ, जिसके अनुसार एक ही व्यक्ति/समूह से जुड़ी कंपनियों की बोलियां तकनीकी स्तर पर निरस्त होनी चाहिए थीं, लेकिन यहां उल्टा इन्हें योग्य घोषित किया गया.

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