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बहरागोड़ा ने खोया अपना एक जुझारू नेता और समाजसेवक

बहरागोड़ा की राजनीति और समाज सेवा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का 6 फरवरी को अंत हो गया. साकरा पंचायत के शासन गांव निवासी और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुरेश जाना का शुक्रवार को निधन हो गया. उनके निधन से न केवल कांग्रेस परिवार, बल्कि संपूर्ण प्रखंड क्षेत्र में शोक लहर व्याप्त है.
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Baharagora: बहरागोड़ा की राजनीति और समाज सेवा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का 6 फरवरी को अंत हो गया. साकरा पंचायत के शासन गांव निवासी और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुरेश जाना का शुक्रवार को निधन हो गया. उनके निधन से न केवल कांग्रेस परिवार, बल्कि संपूर्ण प्रखंड क्षेत्र में शोक लहर व्याप्त है.

 

दिवंगत सुरेश जाना की पहचान एक ऐसे नेता की थी. जो सत्ता के गलियारों से ज्यादा जनता के दिलों में बसते थे. शासन गांव से निकलकर उन्होंने अपनी कार्यकुशलता के दम पर क्षेत्र में कांग्रेस को मजबूती प्रदान की. राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर, सुरेश जाना जी के निधन पर विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं. 

 

क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों का मानना है कि सुरेश जी का व्यक्तित्व मिलनसारिता और संघर्ष का अनूठा संगम था. समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज को मंच प्रदान करना ही उनके जीवन का मुख्य ध्येय था. जैसे ही उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक निवास (शासन गांव) पर रखा गया, समूचा गांव गमगीन हो गया. 

 

स्थानीय कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भारी संख्या में ग्रामीणों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी. परिवार को सांत्वना देने के लिए कई गणमान्य व्यक्ति उनके घर पहुंचे और लगों ने जाना के निधन को एक अपूरणीय क्षति बताया.

 

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