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बसंत पंचमी : आज करें ये उपाय, मिलेगी मां सरस्वती की कृपा

Lagatar desk  : आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पूरे देश में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस दिन विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा के कमंडल से अमृत की बूंदों के पृथ्वी पर गिरने से मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था. यही कारण है कि बसंत पंचमी को ज्ञान और शिक्षा का पर्व माना जाता है. कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं.


छात्रों के लिए विशेष महत्व

बसंत पंचमी का दिन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं और ज्ञान, स्मरण शक्ति तथा बुद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं. इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ शास्त्रों में बताए गए कुछ विशेष उपाय करने से सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं.

 


बसंत पंचमी 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि

 

दृक पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है.

 

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन पूजा के लिए  समय शुभ माने गए हैं

सुबह 7:13 बजे से 8:33 बजे तक

सुबह 8:33 बजे से 9:53 बजे तक

सुबह 9:53 बजे से 11:13 बजे तक

धार्मिक ग्रंथों में पूर्वाह्न काल (सूर्योदय के बाद और दोपहर से पहले) को मां सरस्वती की पूजा के लिए सर्वोत्तम समय बताया गया है.

 

बसंत पंचमी के विशेष उपाय

परीक्षा और प्रतियोगिता में सफलता के लिए उपाय जो विद्यार्थी परीक्षा या प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं, वे बसंत पंचमी के दिन पीले रंग की एक कलम मां सरस्वती के चित्र के सामने रखें. हल्दी, रोली और अक्षत से उसकी पूजा करें और बाद में उसी कलम का प्रयोग पढ़ाई या परीक्षा में करें. मान्यता है कि इससे मां सरस्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.

 

 स्नान, दान और सेवा का महत्व


इस दिन स्नान और दान का भी विशेष महत्व है. श्रद्धालु प्रयागराज संगम में आस्था के साथ स्नान कर सकते हैं. इसके साथ मंत्र जप और दान करें. जरूरतमंद छात्रों को कलम, कॉपी या शिक्षा से जुड़ी सहायता देना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है.

 

पीले वस्त्र और मंत्र जाप


बसंत पंचमी के दिन शुद्ध होकर पीले रंग के वस्त्र धारण करें. मां सरस्वती को पीले पुष्प, पीले फल, पीली मिठाई और पीले वस्त्र अर्पित करें. इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर ‘ह्रीं वाग्देव्यै ह्रीं ह्रीं’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें. ऐसा करने से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

 

 

 

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