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धनबाद एयरपोर्ट आंदोलन से पहले बैनर विवाद, तस्वीरों को लेकर भाजपा में अंदरूनी कलह

Dhanbad: धनबाद में एयरपोर्ट निर्माण की मांग को लेकर शुक्रवार को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन से पहले ही भाजपा के भीतर विवाद उभर कर सामने आ गया है. सांसद ढुल्लू महतो के नेतृत्व में होने वाले इस आंदोलन के प्रचार-प्रसार के लिए लगाए गए बैनर और सोशल मीडिया पोस्ट अब पार्टी के अंदर ही चर्चा और विवाद का कारण बन गए हैं.


रणधीर वर्मा चौक सहित शहर के कई हिस्सों में लगाए गए बैनरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, धनबाद महानगर और ग्रामीण जिला अध्यक्षों के साथ-साथ पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह और बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई गई हैं. हालांकि इन बैनरों से धनबाद विधायक राज सिन्हा और झरिया विधायक रागिनी सिंह की तस्वीरों का गायब होना पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सवाल खड़े कर रहा है.

 


इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है. कुछ कार्यकर्ता इसे जानबूझकर किया गया कदम बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे संगठनात्मक चूक करार दे रहे हैं.

 

वहीं इस मुद्दे को लेकर भाजपा कार्यकर्ता राजीव ओझा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विकास के मुद्दे पर सांसद की इस पहल की वह सराहना करते हैं और इस आंदोलन में सभी भाजपा कार्यकर्ताओं को सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए. हालांकि उन्होंने पोस्टर और बैनर को लेकर नाराजगी भी जताई. 


उन्होंने कहा कि सांसद को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पार्टी सिर्फ किसी एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे संगठन की है. कार्यक्रम के पोस्टर में धनबाद विधायक राज सिन्हा और झरिया विधायक रागिनी सिंह का नाम और तस्वीर भी शामिल होनी चाहिए थी.


राजीव ओझा ने कहा कि इस आंदोलन से जुड़े सभी बैनर-पोस्टर में केवल बाघमारा विधायक पक्ष की तस्वीरों को प्रमुखता देना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर भाजपा ने आपको और आपके भाई को सांसद और विधायक बनाया है तो आपको भी भाजपा संगठन को उसी सम्मान के साथ स्वीकार करना चाहिए न कि इसे केवल टाइगर फोर्स तक सीमित रखना चाहिए.


उन्होंने आगे कहा कि जब पोस्टर में दोनों जिला अध्यक्षों की तस्वीर दी जा सकती है तो दोनों विधायकों की तस्वीरें भी अवश्य होनी चाहिए थीं. उनके अनुसार इस तरह की चूक से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाता है और संगठन के भीतर असंतोष बढ़ता है.

 

इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में जब पार्टी एक बड़े जनआंदोलन की तैयारी में है. इस तरह के विवाद से संगठन की एकजुटता पर असर पड़ सकता है. एयरपोर्ट जैसे अहम मुद्दे पर जनता का समर्थन जुटाने के बजाय आंतरिक मतभेद सामने आना पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है.

 

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