Ranchi: कैबिनेट में लिए गए मुख्यमंत्री के फैसले का झारखंड के प्रोफेसरों ने स्वागत किया है. इस दौरान रांची विश्वविद्यालय के जनजातिय भाषा विभाग के नागपुरी विभागध्यक्ष ने बताया कि झारखंड में नौ भाषा ही मूल भाषा है, जिसमें जनजातिय भाषा में मुंडारी, कुड़ुख, संताली, हो और खड़िया है. वहीं क्षेत्रिय भाषा में खोरठा,नागपुरी,पंचपरगनिया और कुरमाली भाषा है.
नागपुरी विभागध्यक्ष उमेश नंद तिवारी ने कहा कि झारखंड में भोजपुरी,मगही और अंगिका जरुर बोली जाती है. शहर में ही ये भाषा बोली जाती है. लेकिन गांव और सुदुर क्षेत्रों में भोजपुरी,मगही और अंगिका भाषा नहीं बोली जाती है. झारखंडवासी इन तीनों भाषाओं का सम्मान करते हैं. लेकिन ये तीनों भाषा झारखंड की मूल भाषा नहीं हो सकती है.
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