Search

 
 
 

BHU: डॉ. सत्या आत्महत्या प्रयास मामले की जांच शुरू, लंबी ड्यूटी पर उठे सवाल

नारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस) में सर्जरी विभाग की पीजी मेडिकल स्टूडेंट डॉ. सत्या द्वारा आत्महत्या के प्रयास मामले की जांच अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने शुरू कर दी है.
 

Varanasi: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस) में सर्जरी विभाग की पीजी मेडिकल स्टूडेंट डॉ. सत्या द्वारा आत्महत्या के प्रयास मामले की जांच अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने शुरू कर दी है. टीम ने मंगलवार को आईएमएस जाकर निदेशक डॉ. एस.एन. संखवार से मुलाकात की और तथ्यों की जानकारी ली. इसके साथ ही टीम ने आईसीयू में वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहीं डॉ. सत्या को देखा और डॉ. संजीव कुमार सिंह से उनके इलाज की स्थिति जानी. टीम ने डॉ. सत्या के पिता एस.के. चंदन और मां ममता श्रीवास्तव से भी मुलाकात कर पूरी परिस्थितियों को समझा.

 


जांच टीम ने परिसर के विभिन्न छात्रों से भी बातचीत की. गोपनीयता की शर्त पर कुछ स्टूडेंट्स ने चौंकाने वाले खुलासे किए. उन्होंने बताया कि जूनियर डॉक्टरों पर बेहद लंबी ड्यूटी का भारी दबाव रहता है. यहां तक कि अस्पताल में आए कुछ मरीजों ने भी स्वीकार किया कि डॉक्टरों की लगातार लंबी ड्यूटी के कारण इलाज की गुणवत्ता प्रभावित होती है. गौरतलब है कि डॉ. सत्या ने गत 13 मार्च को इंसुलिन की भारी डोज लेकर अपनी जान देने की कोशिश की थी.

 


निदेशक डॉ. संखवार ने टीम के सामने यह तो स्वीकार किया कि मेडिकल छात्रों से लंबी ड्यूटी कराई जाती है, लेकिन उन्होंने डॉ. सत्या की जॉइनिंग से लेकर घटना के दिन तक के ड्यूटी ऑवर्स (काम के घंटे) का डेटा उपलब्ध नहीं कराया. उन्होंने कहा कि इस मामले की आंतरिक जांच कमेटी की रिपोर्ट देने का अधिकार केवल डीन के पास है. वहीं, कुछ छात्रों का मानना है कि यह आत्महत्या के प्रयास का गंभीर मामला है, इसलिए इसकी पुलिस जांच होनी चाहिए.

 


इस फैक्ट फाइंडिंग टीम में ऐपवा की प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा, रोजा मैथ्यू, विभा वाही और आइसा से राजेश, मिहिर व आशीष शामिल हैं. टीम के अनुसार, डॉ. सत्या की हालत में कोई सुधार नहीं दिख रहा है, इसलिए उन्हें किसी उच्चस्तरीय संस्थान में रेफर करने पर विचार होना चाहिए. टीम ने कहा कि अन्य तथ्य सामने आने तक जांच जारी रहेगी. ऐपवा-आइसा ने वाराणसी के नागरिक समाज से डॉ. सत्या को न्याय दिलाने के लिए आगे आने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ी कोई भी जानकारी हो, तो वे साझा करें, उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही