Ranchi/Jamtara : झारखंड सरकार एक ओर वैध बालू कारोबार शुरू कराने की दिशा में प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन की सुस्ती के कारण 17 बालू घाटों का एग्रीमेंट अब तक लंबित पड़ा है. ऐसा ही मामला जामताड़ा जिले में सामने आया है, जहां बांकेट बालू घाट के एग्रीमेंट की फाइल पिछले 10 दिनों से डीसी कार्यालय में अटकी हुई है.
इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. उन्हें 15 गुना अधिक कीमत पर बालू खरीदनी पड़ रही है. वहीं सरकार को भी करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. जबकि अवैध बालू कारोबारियों की चांदी कट रही है. जिला प्रशासन की इस लापरवाही से पूरे सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं.
जामताड़ा का सबसे बड़ा बालू घाट है बांकेट
जामताड़ा का बांकेट बालू घाट जिले का सबसे बड़ा बालू घाट माना जाता है. इस घाट में करीब 6 लाख 28 हजार सीएफटी बालू रिजर्व है. घाट का कुल क्षेत्रफल 4.51 हेक्टेयर है और इसका ई-सी (पर्यावरण स्वीकृति) 11 फरवरी 2026 को ही मिल चुका है.
नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्राम सभा, स्टांप ड्यूटी कैलकुलेशन और मॉडल डीड अपडेट सहित सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं भी पूरी कर ली गई हैं. इसके बाद विभाग की ओर से करीब 10 दिन पहले लीज एग्रीमेंट के लिए फाइल उपायुक्त कार्यालय भेजी गई थी, लेकिन अब तक उस पर हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं.
बंदोबस्ती नियमावली लागू हुए बीत गए 20 दिन
जानकारी के अनुसार नई बालू घाट बंदोबस्ती नियमावली लागू होने के बाद करीब 20 दिन बीत चुके हैं. शुरुआत में राज्य के किसी भी जिले में उपायुक्त एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे थे. डीसी स्तर से यह तर्क दिया जा रहा था कि एग्रीमेंट का प्रारूप कैबिनेट से अनुमोदित नहीं है.
बाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद एग्रीमेंट प्रारूप पर सहमति दी, जिसके बाद बोकारो, रांची, जमशेदपुर, लातेहार, गोड्डा और हजारीबाग समेत कई जिलों में सफल ठेकेदारों के साथ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर भी हो गए. इसके बावजूद जामताड़ा में फाइल डीसी कार्यालय से आगे नहीं बढ़ रही है.
विभागीय आदेश को गंभीरता से नहीं ले रहा जामताड़ा प्रशासन
सूत्रों का कहना है कि खान विभाग ने 35 बालू घाटों की प्रक्रिया 10 दिनों में पूरी करने का निर्देश दिया था. लेकिन जामताड़ा प्रशासन इस निर्देश को गंभीरता से नहीं ले रहा. वर्तमान में राज्य के करीब 17 बालू घाटों का एग्रीमेंट डीसी स्तर पर लंबित बताया जा रहा है.
अगर एनजीटी की रोक से पहले बांकेट बालू घाट शुरू हो जाता तो जिले के लोगों को सस्ती दरों पर बालू उपलब्ध हो सकती है. इससे निर्माण कार्यों की लागत कम होती और एक घाट से करीब 500 लोगों को रोजगार भी मिलता. लेकिन प्रशासनिक ढिलाई के कारण वैध कारोबार शुरू नहीं हो पा रहा और अवैध बालू माफिया इसका खुलकर फायदा उठा रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं तो आखिर जामताड़ा प्रशासन एग्रीमेंट करने में देरी क्यों कर रहा है. यह सवाल अब केवल आम लोगों ही नहीं, बल्कि खान विभाग के अधिकारियों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है.
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