- सम्राट सरकार ने अफसरों को दिया अल्टीमेटम
Patna: बिहार में लोगों की शिकायतों के निपटारे को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. सीएम सम्राट चौधरी ने सोमवार को ‘सहयोग शिविर’, ‘सहयोग हेल्पलाइन’ और ‘सहयोग पोर्टल’ को लॉन्च किया. इस मौके पर उन्होंने साफ कहा कि अब सरकारी फाइलों को महीनों तक दबाकर रखने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी.
सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार ने इसके लिए निशुल्क हेल्पलाइन नंबर 1100 जारी किया है, जहां कॉल कर लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. शिकायतों के समाधान में लापरवाही करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी, अब किसी भी कीमत पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
30 दिन में समाधान नहीं तो कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि सहयोग पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का निपटारा एक महीने के भीतर करना होगा. यदि तय समयसीमा में समाधान नहीं हुआ तो संबंधित पदाधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ पहले निलंबन और फिर जरूरत पड़ने पर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई होगी. इस पूरी व्यवस्था की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) करेगा. अब शिकायतों के निपटारे की जवाबदेही तय होगी और हर लेवल पर मॉनिटरिंग की जाएगी.
हर महीने लगेगा ‘सहयोग शिविर’
सरकार ने 'सबका सम्मान, जीवन आसान' निश्चय के तहत नई व्यवस्था शुरू की है. इसके तहत हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को राज्यभर के पंचायत सरकार भवनों में ‘सहयोग शिविर’ लगाए जाएंगे. इन शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होंगे और मौके पर ही लोगों की शिकायतें सुनेंगे. सरकार का दावा है कि इस सहयोग शिविर से ग्रामीण इलाकों के लोगों को बार-बार प्रखंड और जिला कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
गांवों तक पहुंचेगी सरकार
नई योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों पर रखा गया है. सरकार का मानना है कि लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है. कई मामलों में शिकायतें या तो दबा दी जाती हैं या फिर महीनों तक कार्रवाई नहीं होती. इसी के चलते पंचायत स्तर पर ही अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है.
ऑनलाइन शिकायत के लिए पोर्टल लॉन्च
लोगों के लिए सरकार ने डिजिटल सुविधा के तौर पर sahyog.bihar.gov.in पोर्टल भी शुरू किया है. इस पोर्टल पर लोग अपनी शिकायत या परिवाद ऑनलाइन दर्ज करा सकेगा. सरकार ने दावा किया है कि हर शिकायत का 30 दिनों के भीतर निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा और शिकायतकर्ता को लिखित रूप से इसकी जानकारी भी दी जाएगी. इससे शिकायत प्रक्रिया को पारदर्शी और निगरानी करने के तौर पर देखा जा रहा है.
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