Patna : ठेकेदार रिशु श्री मनी लांड्रिंग और टेडर हेराफेरी मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. इस मामले में बिहार सरकार ने दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. 2017 बैच के आईएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर और 2014 बैच की अभिलाषा कुमारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है. दोनों अधिकारियों पर लापरवाही और अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को लेकर कार्रवाई की गई है. दोनों अधिकारियों पर ठेकेदार रिशुश्री से गलत लाभ लेने के आरोप है.
योगेश कुमार सागर समाज कल्याण विभाग में तैनात थे. योगेश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली के हैं. उन्होंने 2012 में लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से MBBS किया था.
जबकि, अभिलाषा शर्मा 2014 बैच की IAS अधिकारी हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गृह मंत्रालय नई दिल्ली से की थी. बिहार में आने के बाद वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं, जिनमें सीतामढ़ी की DM भी शामिल है. बाद में उन्होंने वित्त विभाग में संयुक्त सचिव के तौर पर काम किया. वर्तमान में वे ग्रामीण विकास विभाग में अतिरिक्त CEO और डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात हैं.
दरअसल, विशेष निगरानी इकाई ने हाल ही में ठेकेदार रिशुश्री को टेंडर हेराफेरी और मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था. उसके आवास की तलाशी भी ली गई थी जिसमें साक्ष्य हाथ लगे थे. गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ और जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं.
जांच एजेंसियों की प्राथमिकी और ईडी की जांच के अनुसार रिशुश्री ने अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा नेटवर्क तैयार कर रखा था, जिसके जरिए रिश्वत और कमीशन की रकम को वैध कारोबारी लेन-देन के रूप में दिखाया जाता था.
जांच में सामने आया है कि मनचाही कंपनियों को सरकारी टेंडर दिलाने के बाद रिशुश्री अपनी ही कंपनी को उपठेकेदार के रूप में शामिल करवा देता था. इसके बाद बढ़े हुए बिल जारी किए जाते थे, ताकि कमीशन और रिश्वत की राशि को नियमित व्यावसायिक भुगतान के रूप में दर्शाया जा सके और किसी को शक न हो.
ईडी के अनुसार, रिशुश्री केवल टेंडर मैनेज करने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह कई अधिकारियों तक रिश्वत की रकम पहुंचाने, उस धन के निवेश और प्रबंधन की व्यवस्था भी करता था. ईडी की जांच में सामने आया है कि ठेकेदार रिशु श्री ने आईएएस योगेश कुमार सागर और उनके 8 रिश्तेदारों को विदेश यात्रा कराई थी.
जांच में विदेश यात्राओं, रियल एस्टेट निवेश और करोड़ों रुपये की संपत्तियों के दस्तावेज भी सामने आए हैं. एजेंसियों का दावा है कि वह कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों के प्रबंधन से भी जुड़ा हुआ था.
छापेमारी के दौरान जब्त मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में यह भी पता चला है कि पिछले पांच से छह वर्षों में रिशुश्री की विदेश यात्राओं में असामान्य वृद्धि हुई थी. जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं.
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