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बच्चा चोरी की अफवाहों पर एक्शन मोड में बिहार पुलिस, सभी जिलों के थानों को सख्त निर्देश

झारखंड और बिहार में इन दिनों बच्चा चोरी की अफवाहों ने माहौल तनावपूर्ण कर दिया है.  कई जगहों पर शक के आधार पर लोगों की पिटाई की घटनाएं सामने आ रही हैं. हालात को देखते हुए बिहार पुलिस मुख्यालय ने सख्ती दिखाते हुए सभी जिलों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है.
 

Lagatar Desk : झारखंड और बिहार में इन दिनों बच्चा चोरी की अफवाहों ने माहौल तनावपूर्ण कर दिया है.  कई जगहों पर शक के आधार पर लोगों की पिटाई की घटनाएं सामने आ रही हैं. हालात को देखते हुए बिहार पुलिस मुख्यालय ने सख्ती दिखाते हुए सभी जिलों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है. 

 

मुख्यालय ने साफ कहा है कि यदि कोई बच्चा 24 घंटे तक लापता रहता है तो तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जाए. गुमशुदगी के मामलों को हल्के में नहीं लेने और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर नजर रखने को कहा गया है.  अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. 

 

कानून अपने हाथ में ना लें, तुरंत पुलिस को दें सूचना

सीआईडी (कमजोर वर्ग) के एडीजी अमित कुमार जैन ने बताया कि हाल में सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर बच्चा चोरी की कई झूठी खबरें फैलाई गईं, जिससे लोगों में डर फैल गया.  पिछले दो दिनों में पांच ऐसी सूचनाएं मिली थीं. इनमें मुजफ्फरपुर से दो और जमुई, पूर्णिया और नालंदा से एक-एक मामले शामिल थे. लेकिन जांच में ये सभी खबरें अफवाह निकली. 

 

 

एडीजी ने कहा कि ऐसी खबरें तेजी से फैलती हैं और भीड़ भावनाओं में बहकर हिंसक हो सकती है. इससे निर्दोष लोगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है. उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के साथ खुद कार्रवाई न करें.  तुरंत डायल-112 या नजदीकी थाने को सूचना दें. 

 

बच्चों को ढूंढ़ने व मानव तस्करी रोकने के लिए AHTU सक्रिय 

राज्य में बच्चों की तलाश और मानव तस्करी रोकने के लिए 44 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) सक्रिय हैं. इसके अलावा पटना, गया और दरभंगा में विशेष इकाइयां काम कर रही हैं. पूर्णिया एयरपोर्ट पर भी नई यूनिट बनाने की योजना है. 

 

भारत सरकार के ‘वात्सल्य पोर्टल’ से भी मदद मिल रही है. इस पोर्टल से देशभर के थाने जुड़े हैं. अगर बिहार का कोई बच्चा दूसरे राज्य में मिलता है तो तुरंत सूचना संबंधित जिले को मिल जाती है और उसे सुरक्षित घर पहुंचाया जाता है. बता दें कि अगर यदि कोई बच्चा चार महीने तक नहीं मिलता है तो मामला एएचटीयू को सौंप दिया जाता है. 

 

गुमशुदगी के 14,699 मामले, 7,772 बच्चें सुरक्षित बरामद

पुलिस आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 से अब तक गुमशुदगी के 14,699 मामले दर्ज हुए हैं. इनमें 12,526 लड़कियां और 2,173 लड़के शामिल हैं. हालांकि 7,772 बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है. जबकि 6,927 बच्चे अब भी लापता हैं. 

 

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