Patna News: संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शांति निर्माण के मुद्दे पर लोक जनशक्ती पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने भारत का पक्ष रखा. न्यूयॉर्क में आयोजित बैठक में उन्होंने अफ्रीका में स्थाई शांति के लिए राष्ट्रीय स्वामित्व, देशों की जरूरतों के अनुसार मदद देने और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने पर जोर दिया. अरुण भारती ने संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण आयोग और अफ्रीकी संघ शांति एवं सुरक्षा परिषद की नौवीं वार्षिक परामर्श बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया.
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न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के ईसीओएसओसी चैंबर में आयोजित इस बैठक में उन्होंने कहा कि शांति निर्माण की प्रक्रिया में राष्ट्रीय स्वामित्व सर्वोपरि होना चाहिए. वहां की जरूरतों को प्राथमिकताओं को तय करने की जिम्मेदारी भी संबधित देश की सरकार की होनी चाहिए है.
उन्होंने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहायता संबंधित देश की जरूरतें और प्राथमिकताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए. इसका उद्देश्य उस देश के प्रयासों को मजबूत करना होना चाहिए, न कि उनकी जगह खुद फैसले लेना. देशों के बीच सहयोग के लिए बनाए जाने वाले नियम लचीले होने चाहिए. हर देश की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए सभी पर एक जैसा तरीका लागू करना सही नहीं होगा.
आगे उन्होंने कहा कि शांति निर्माण के प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण कोष, अफ्रीकी विकास बैंक और अन्य साझेदारों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई. कहा कि स्थाई शांति के लिए केवर आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है, बल्कि विकास की प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी भी जरूरी है.
अरुण ने सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में डिजिटल तकनीक की भूमिका पर भी बात रखी. कहा कि डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था में सरकारी सेवाओं को अधिक आसान, प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है.
अरुण ने वर्ष 2025 में संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण व्यवस्था की समीक्षा का जिक्र किया. इस समीक्षा में दोनों संस्थाओं के बीच साझेदारी मजबूत करने और पहले हुए बैठकों में लिए गए फैसलों पर आगे काम कने की व्यवस्था बनाने पर जोर दिया.
अरुण ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए एक्स पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए पीएम मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और लोजपा (रामविलास) अध्यक्ष चिराग पासवान के प्रति आभार जताया. लिखा, आज संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से वक्तव्य रखने का गौरव मिला. संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण आयोग और अफ्रिकी संघ शांति एवं सुरक्षा परिषद की नौवीं वार्षिक बैठक में मैंने कहा कि शांति तभी टिकाऊ होती है जब वह समावेशी हो, जब उसमें महिलाओं और युवाओं की भागीदारी हो, और जब वह संबंधित देश की अपनी प्राथमिकताओं पर आधारित हो. भारत का दृष्टिकोण "वसुधैव कुटुम्बकम्" से प्रेरित है. जमुई की आवाज, आज भारत की आवाज बनकर विश्व मंच पर.
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