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झारखंड के किसानों की आशाओं का केंद्र है बिरसा कृषि विश्वविद्यालय : राज्यपाल

Ranchi :  राज्यपाल-सह-झारखंड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने शुक्रवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), रांची के 46वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि झारखंड के किसानों की आशाओं, आकांक्षाओं और ग्रामीण विकास का महत्वपूर्ण केंद्र है.

 

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान और कृषि प्रसार कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. राज्यपाल ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध प्राकृतिक संपदा, जैव-विविधता और जनजातीय परंपराओं से जुड़ी हुई है और राज्य की बड़ी आबादी कृषि और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर है.

 

उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा जैविक खेती, श्री अन्न (मिलेट्स), बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधानों की सराहना करते हुए कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में ऐसी तकनीकों का विकास जरूरी है, जो किसानों के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हों.

 

राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि अनुसंधान, नवाचार, कृषि उद्यमिता और किसानों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना भी है. उन्होंने कहा कि वे स्वयं कृषक परिवार से आते हैं, इसलिए किसानों की समस्याओं और उनकी अपेक्षाओं को भली-भांति समझते हैं.

 

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि किसी भी अनुसंधान की सफलता का वास्तविक पैमाना शोधपत्रों की संख्या नहीं, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि, उनकी समस्याओं का समाधान और उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव होने चाहिए. उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान का अंतिम उद्देश्य प्रयोगशाला की सफलता नहीं, बल्कि खेत और किसान की समृद्धि होना चाहिए.

 

गंगवार ने कहा कि झारखंड में बागवानी, वानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और लाख उत्पादन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने अनुसंधान, मूल्य संवर्धन और आधुनिक विपणन व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि कृषि को केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि उद्यमिता और समृद्धि का आधार बनाया जाना चाहिए.

 

 

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