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1 अक्टूबर से जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम बदलेंगे, लागू होंगे नए प्रावधान

National News: यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक साल बाद, लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), अनुमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या DM द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा. संबंधित अधिकारी जन्म या मृत्यु की जानकारी की सत्यता का सत्यापन करने के बाद निर्धारित शुल्क के भुगतान पर आदेश जारी कर सकेंगे.
 
जन्म-मृत्यु पंजीकरण

New Delhi: जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी करने वालों के लिए अब प्रक्रिया और सख्त होगी. जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधान 1 अक्टूबर से लागू होंगे. केंद्र सरकार ने 16 सितंबर को अधिसूचना जारी किए हैं. संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक सटीक,पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है. नए प्रावधानों में देरी से होने वाले पंजीकरण के लिए अलग-अलग स्तर पर सत्यापन और अनुमति की व्यवस्था की गई है. संसद के मॉनसून सत्र में विधेयक लोकसभा से 31 जुलाई और राज्यसभा से 4 अगस्त को पारित हुआ था. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम 2026 बन गया.

 

एक से दो साल की देरी पर DM या SDM की अनुमति

यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक साल बाद, लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), अनुमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या DM द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा. संबंधित अधिकारी जन्म या मृत्यु की जानकारी की सत्यता का सत्यापन करने के बाद निर्धारित शुल्क के भुगतान पर आदेश जारी कर सकेंगे.

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दो साल से अधिक देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश

जन्म या मृत्यु की सूचना दो साल से अधिक समय बाद देने पर पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आदेश अनिवार्य होगा. इस मामले में भी संबंधित अधिकारी रिकॉर्ड की सत्यता का सत्यापन करेंगे. निर्धारित शुल्क लिया जाएगा.


देरी वाले मामलों में बढ़ेगी निगरानी

नए प्रावधानों से पहले से लंबे समय से लंबित जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में अतिरिक्त जांच और निगरानी की व्यवस्था होगी. सरकार का उद्देश्य रिकॉर्ड में गलत जानकारी या अनियमित तरीके से होने वाले विलंबित पंजीकरण को रोकना और जन्म-मृत्यु के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय बनाना है.

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