- बीआईटी मेसरा विकसित भारत के निर्माण में निभाएगा अहम योगदान : राज्यपाल
Ranchi : बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा का 72वां स्थापना दिवस बुधवार को संस्थान के सीएटी ऑडिटोरियम में भव्य समारोह के साथ मनाया गया. कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल व बीआईटी के विजिटर संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. समारोह में संस्थान की सात दशक से अधिक की गौरवशाली यात्रा, वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य की विकास योजनाओं को रेखांकित किया गया.
समारोह में बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना, टेगा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष व 1964 बैच के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र मदन मोहन मोहंका तथा आईआईटी भुवनेश्वर के निदेशक प्रो. श्रीपद कर्मलकर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव राजेश जैन ने किया.

अपने संबोधन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि स्थापना दिवस केवल संस्थान की स्थापना का स्मरण नहीं, बल्कि उसकी उपलब्धियों और भविष्य के संकल्पों का उत्सव है. उन्होंने कहा कि बीआईटी मेसरा ने सात दशकों से अधिक समय में उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा के माध्यम से देश और दुनिया को प्रतिभाशाली इंजीनियर, वैज्ञानिक और उद्योग जगत के अग्रणी विशेषज्ञ दिए हैं.
राज्यपाल ने कहा कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और हरित ऊर्जा जैसी नई तकनीकों का है. ऐसे समय में तकनीकी संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उन्हें अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप, उद्यमिता और सामाजिक समस्याओं के समाधान का केंद्र बनना होगा.
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, विकसित भारत-2047, आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और इंडिया एआई मिशन का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि रोजगार सृजक (Job Creator) बनने का आह्वान किया. राज्यपाल ने कहा कि झारखंड की खनिज और प्राकृतिक संपदा को देखते हुए बीआईटी मेसरा को खनन, इस्पात, ऊर्जा, कृषि और सतत विकास के क्षेत्रों में तकनीकी समाधान विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी दक्षता के साथ नैतिकता, नेतृत्व, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी अपनाने की अपील की.
विशिष्ट अतिथि प्रो. श्रीपद कर्मलकर ने अपने प्रेरक व्याख्यान में कहा कि तकनीकी शिक्षा में केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि कम्युनिकेशन स्किल, सहयोग, क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या समाधान और व्यावसायिक समझ भी उतनी ही आवश्यक है. उन्होंने कहा कि जटिल तकनीकी विषयों को सरल भाषा में समझाने की क्षमता ही वास्तविक संचार कौशल है. उन्होंने आधुनिक शिक्षण पद्धति, प्रॉब्लम-बेस्ड लर्निंग और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर विशेष जोर दिया तथा विद्यार्थियों से समाज की जरूरतों को समझकर नवाचार करने की अपील की.
इस अवसर पर 1986, 1996 और 2001 बैच के पूर्व छात्र विशेष रीयूनियन में शामिल हुए. देश-विदेश से आए पूर्व छात्रों की मौजूदगी ने समारोह को यादगार बना दिया.समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 11 प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों को 'डिस्टिंग्विश्ड एलुमनी अवार्ड' तथा 3 शिक्षकों को 'डिस्टिंग्विश्ड टीचर अवार्ड' से सम्मानित किया गया.
डिस्टिंग्विश्ड टीचर अवार्ड से सम्मानित प्रो. जी.बी. पंत, जिन्होंने बीआईटी मेसरा में स्पेस इंजीनियरिंग एवं रॉकेट्री विभाग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उनकी ओर से उनके पुत्र डी.के. पंत ने भावनात्मक संदेश साझा किया. इसके अलावा प्रो. उत्पल बाउल, जो स्वयं बीआईटी के पूर्व छात्र भी हैं, तथा प्रख्यात शोधकर्ता व मार्गदर्शक प्रो. बी.एन. दास को भी सम्मानित किया गया.
समारोह के अंत में कुलसचिव राजेश जैन ने सभी अतिथियों, पूर्व छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आयोजन समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बीआईटी मेसरा आने वाले वर्षों में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूता रहेगा.


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