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Palamu News: भाजपा ने मनाया संविधान हत्या दिवस, आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय

भाजपा जिला इकाई की ओर से शनिवार को दीनदयाल सभागार में ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में 1975 में लगाए गए आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस की तत्कालीन सरकार की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा प्रहार बताया गया.
 

Palamu: भाजपा जिला इकाई की ओर से शनिवार को दीनदयाल सभागार में ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में 1975 में लगाए गए आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस की तत्कालीन सरकार की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा प्रहार बताया गया.

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि 25 जून 1975 की आधी रात को देश में आपातकाल लागू कर लोकतंत्र की हत्या की गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखने वाले लोगों को मीसा के तहत जेल भेजा गया और उन्हें यातनाएं दी गईं. 


उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज संविधान की दुहाई देकर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है, जबकि उसका इतिहास आपातकाल जैसे काले अध्याय से जुड़ा रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों से केंद्र सरकार सेवा, सुशासन और जनकल्याण के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए गांव, गरीब, किसान, महिला और युवाओं तक विकास पहुंचाने के लिए काम कर रही है.

 

झारखंड विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय है. उन्होंने कहा कि उस दौर में संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं का गला घोंटा गया, जिसका परिणाम बाद में तत्कालीन सरकार को भी भुगतना पड़ा. उन्होंने जनसेवा को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि स्वार्थ की राजनीति से देश और समाज दोनों का नुकसान होता है.

 

पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने कहा कि आपातकाल के दौरान बिना कारण लोगों को गिरफ्तार कर जेल में बंद किया गया, जिससे लोकतंत्र और संविधान दोनों शर्मसार हुए. उन्होंने कहा कि जनता का सरकार पर विश्वास कमजोर हुआ और अंततः लोगों ने तत्कालीन सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया.

 

भाजपा के प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्र ने कहा कि आपातकाल भारत के संविधान और लोकतंत्र पर कुठाराघात था, जिसकी पीड़ा आज भी जनमानस महसूस करता है.

 

कार्यक्रम के दौरान आपातकाल के समय मीसा के तहत जेल जा चुके तारकेश्वर आजाद, रविशंकर पांडेय सहित अन्य वक्ताओं ने उस दौर के अपने अनुभव और विचार साझा किए.

 

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