- इंदिरा गांधी की सरकार के दौरानअधिकतर सरकारी विभाग सीआईए के प्रभाव में थे
- कांग्रेस और उसका इतिहास निजी लाभ के लिए राष्ट्रीय हितों को बेचने का रहा है
- कम्युनिस्टों की सरकार बनने से रोकने के मकसद से कांग्रेस पार्टी को धन मुहैया कराया गया
NewDelhi : भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का एक नया मौका मिल गया है. पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब के हवाले से राहुल गांधी द्वारा किये जा रहे हमलों से असहज भाजपा को मौका यह मिला है पॉल एम मैकगर की किताब से.
In the book 'Spying in South Asia: Britain, the United States, and India’s Secret Cold War' by Paul M. McGarr, it is mentioned that during Indira Gandhi’s government, there was hardly any department in India that was not under the influence of the American intelligence agency,… pic.twitter.com/XR6bHtIFD0
— BJP (@BJP4India) February 27, 2026
दक्षिण एशिया में शीतयुद्ध काल में जासूसी गतिविधियों पर आधारित पॉल एम मैकगर की किताब ने यह मौका उपलब्ध कराया है.
दरअसल पॉल एम मैकगर की किताब स्पाईइंग इन साउथ एशिया: ब्रिटेन, द यूनाइटेड स्टेट्स एंड इंडियाज सीक्रेट कोल्ड वॉर में दावा किया गया है कि इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान भारत में अधिकतर सरकारी विभाग अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के प्रभाव में थे.
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉंफ्रेंस कर किताब के हवाले से दावा किया कि सीआईए ने दो अवसरों पर भारतीय राजनीति में दखलंदाजी की दोनों अवसरों पर सीआईए ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को धन भेजा,
एक अवसर पर राशि सीधे श्रीमती गांधी को दी गयी. भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने निजी लाभ के लिए राष्ट्रीय हितों को बेच दिया.
पॉल की किताब के अनुसार 1957 में जब चीन–भारत संबंधों में तल्खी आयी, तब आईबी ने नेहरू को बीजिंग में एक खुफिया अधिकारी तैनात करने के लिए राजी किया.
इस फैसले में विदेश मंत्रालय और चीन में भारत के राजदूत आरके नेहरू की आपत्तियां पर ध्यान नहीं दिया गया. भाजपा ने किताब के हवाले से दावा किया कि कांग्रेस और उसका इतिहास निजी लाभ के लिए राष्ट्रीय हितों को बेचने का रहा है.
लेखक पॉल एम मैकगर ने अपनी किताब में लिखा है अमेरिकी जासूसी एजेंसी सीआईए ने भारत में राजनीतिक घटनाक्रमों को प्रभावित करने का प्रयास किया था.
मैकगर ने लिखा है कि राजदूत मोयनिहैन ने 1978 में प्रकाशित पुस्तक अ डेंजर्स प्लेस में लिखा है कि सीआईए ने केरल और पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों की सरकार बनने से रोकने के मकसद से तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को धन मुहैया कराया था.
पॉल एम मैकगर ने मोयनिहैन के हवाले से दावा किया कि उस समय कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं इंदिरा गांधी को यह धन सीधे दिया गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन द्वारा नियुक्त राजदूत मोयनिहैन के अनुसार, इंदिरा गांधी को अमेरिका समेत विदेशी खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग करने में कोई खास आपत्ति नहीं थी.
1964 के बाद कैबिनेट मंत्री बनीं इंदिरा गांधी के संदर्भ में यह मानना मुश्किल है कि वह भारत सरकार की सहमति से चल रही इन कथित गतिविधियों से अनजान रही हों.
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जब पाकिस्तान अपने परमाणु परीक्षण करने की तैयारी कर रहा था, तब एक परमाणु जांच विश्लेषक ने अपनी पुस्तक में लिखा था कि पाकिस्तान के कहुटा रिएक्टर को नष्ट करने का एक प्रस्ताव सामने आया था.
इजराइल इस ऑपरेशन में मदद के लिए तैयार था, लेकिन इंदिरा गांधी योजना को आगे बढ़ाने के लिए राजी नहीं हुईं.
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