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बोकारो : गवई बराज परियोजना पर अब तक खर्च हुए 200 करोड़, 52 साल में भी पूरा नहीं हुआ काम

Dinesh kumar Panday
Bokaro : जिले के चास प्रखंड के पिंड्राजोरा से चंदनकियारी तक लगभग 32 किलोमीटर का गवई बराज परियोजना का निर्माण कई सालों से चल रहा है. इस परियोजना की शुरूआत 1970 में हुई थी. लगभग 50 से ज्यादा हो जाने के बाद भी यह परियोजना पूरी नहीं हो पायी है. इस परियोजना में अबतक दो सौ करोड़ रूपये भी खर्च हो चुके है. इस योजना का उद्देश्य 12 पंचायतों के करीब 70 हजार किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना था. लेकिन इतने साल गुजर जाने के बाद भी किसानों को इस परियोजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. पढ़ें - बोकारो">https://lagatar.in/bokaro-there-is-a-shortage-of-drinking-water-in-das-tola-for-one-and-a-half-months-the-operator-abused-and-abused-on-complaining-women-reached-the-police-station/">बोकारो

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2016 में परियोजना के रिनोवेशन का काम शुरू हुआ

बता दें कि गवाई और बराज नदी के पानी को पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के चेक डैम से सीधे चंदनकियारी के सुदूरवर्ती इलाकों में पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. इसके लिए पिंड्राजोरा पंचायत में गवाई नदी में फाटक लगाया गया है. जहां पानी को रोकने के लिए केचमेंट एरिया का निर्माण होना है. जिससे इस गवाई बराज के पानी को नहर के जरिए किसानों के खेतों तक पहुंचाया जा सके.
1970 में जब इस परियोजना की शुरूआत हुई तो ऐसा लगा की जल्द ही किसानों को इसका लाभ मिलेगा. लेकिन यह परियोजना बीच में ही दम तोड़ दिया. जिसके बाद 2016 में परियोजना के रिनोवेशन का काम शुरू हुआ. जिसका लक्ष्य 2018 तक पूरा करना था. रिनोवेशन का काम148 करोड़ में फिर से चालू किया गया. लेकिन 2022 हो जाने के बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया.
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सरकारों का ध्यान इस परियोजना को पूरा करने की तरफ नहीं गया

झारखंड में समय के साथ- साथ सरकार बदलती रही, परन्तु किसी भी सरकार का ध्यान इस परियोजना को पूरा करने की तरफ नहीं गया. जिसकी भी सरकार बनी बस दूसरे को दोषी ठहराते रहे. जब राज्य में बीजेपी की सरकार आयी तो थोड़ी सुगबुगाहटे शुरू हुई. लेकिन सरकार बदलते ही फिर से परियोजना अधड़ में अटक गयी.
अब किसानों के मन में यह सवाल आ रही है कि निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ,कितने दिनों में पूरा होगा. लेकिन घटिया निर्माण के कारण कई जगहों पर ढलाई टूट गये है. हाथ से भी उसे उखाड़ा जा सकता है. जिसको देखकर ऐसा लग रहा है कि विभागीय अधिकारियों के लापरवाही से ठेकेदार की चांदी कट रही है.
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इस योजना में पानी की तरह पैसे बहाये गये

बता दें कि इस परियोजना का लक्ष्य पानी को डंप कर नहर में छोड़ना था. किसानों को नहर से खेती के लिए पानी देना था.जिस इलाके में पेयजल आपूर्ति की समस्या थी, वहां इस नहर में पंप लगाकर जलापूर्ति करना था. लेकिन 52 सालों में गेट तक नहीं लग पाया. इस योजना के लिए पानी की तरह पैसे बहाये गये, लेकिन यह योजना धरातल पर नहीं उतर पायी.परियोजना के पूरा नहीं होने का कारण किसानों के कुछ रैयती जमीन भी है. जमीन के एवज में कुछ किसानों का क्षतिपूर्ति राशि नही दी गई है. लिहाजा जब भी काम शुरू होता है किसान विरोध शुरू कर देते है.
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परियोजना पूरी नहीं होने के कारण किसान परेशान

जब लगातार. इन के संवाददाता ने लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि परियोजना पूरी नहीं होने के कारण किसान परेशान है. बार बार मौसम के बेरुखी से कृषि कार्य प्रभावित होता है. किसानों ने बताया कि इस साल भी नहर के जरिए पानी नहीं मिल पायेगा. जिससे उनकी खेती प्रभावित होगी.
जब इस बारे में चंदनकियारी के विधायक सह पूर्व राज्यमंत्री अमर कुमार बाउरी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सरकार 70 के दशक में शुरू हुआ काम अबतक पूरा नहीं हुआ.किसानों के सामने भुखमरी का संकट बरकरार है.
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