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बोकारो: भाषा की आड़ में समाज का विभाजन नहीं करे सरकार- अखिलेश

  • 12 अप्रैल को रांची में झारखंड व शाहाबाद रिश्ते पर सेमिनार

Bokaro: झारखंड सरकार भाषा की आड़ में समाज को विभाजित करने की कोशिश न करे. भाषा की कोई सीमा नहीं होती है. झारखंड के निर्माण में भोजपुरी, मगही भाषी लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. ये बातें शहाबाद महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष अखिलेश कुमार ने गुरुवार को बोकारो परिसदन में संवाददाताओं से बातचीत में  कहीं.


उन्होंने बताया कि 12 अप्रैल को रांची के प्रेस क्लब में झारखंड और शहाबाद के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक सम्बंधों पर सेमिनार होने जा रहा है. झारखंड सरकार ने 21 अप्रैल को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा में भोजपुरी व मगही जैसी भाषाओं को दरकिनार कर जो गाइडलाइन जारी की है वह  अनुचित है. 

 


अखिलेश कुमार ने कहा कि बोकारो, धनबाद, रांची, जमशेदपुर सहित झारखंड के अन्य हिस्सों में  बड़ी संख्या में भोजपुरी बोलने वाले लोग रहते हैं. वहां मगही भाषा भी बोली जाती है. झारखंड में कुडुख भाषा बोली जाती है, जिसका मुख्यतः उरांव समाज उपयोग करता है. उनके पूर्वज रोहतास गढ़ किला के रहे हैं. लेकिन दुर्भाग्य है कि कुडुख जैसी महत्वपूर्ण भाषा को भी राज्य के सभी जिलों के अभ्यर्थियों के लिए नहीं दिया गया है.


उन्होंने कहा है कि बिहार के शहाबाद क्षेत्र का झारखंड से आदिकाल से चले आ रहे सम्बन्ध को प्रगाढ़ बनाए रखने की जरूरत है. इसी उद्देश्य से 12 अप्रैल को रांची में सेमिनार रखा गया है. इसमें झारखंड में रहने वाले शहाबाद क्षेत्र के बुद्धिजीवियों के साथ-साथ समाज में अहम भूमिका निभाने वाले उरांव समाज के लोगों को भी आमंत्रित किया जा रहा है.

 

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